बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत कक्षा पहली में प्रवेश प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। एक रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए अवकाश के दिन विशेष सुनवाई की।
यह भी पढ़े :- दुष्कर्म के बाद हत्या से दहला प्रदेश, गृहमंत्री बोले- दोषी को दिलाएंगे कड़ी सजा
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी जताई और राज्य सरकार से विस्तृत हलफनामा मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी।
38 हजार आवेदन, 16 हजार से अधिक लंबित
सुनवाई में सामने आया कि कुल 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 का सत्यापन हो सका है, जबकि 16 हजार से अधिक आवेदन अब भी लंबित हैं। कई जिलों में सत्यापन की स्थिति बेहद कमजोर पाई गई। कोर्ट ने माना कि नोडल प्राचार्यों की धीमी कार्यप्रणाली के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
लॉटरी प्रक्रिया पर भी संकट
कोर्ट ने कहा कि 13 से 17 अप्रैल के बीच प्रस्तावित स्कूल आवंटन की लॉटरी प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है, जिससे अभिभावकों को परेशानी होगी। इस संबंध में सरकार से जवाब तलब किया गया है।
बिलासपुर की बदहाल व्यवस्था पर भी सख्ती
इसी के साथ हाईकोर्ट ने बिलासपुर में गंदगी और अधूरी नाली निर्माण को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। एक समाचार के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
अधूरी नाली, टूटी पाइपलाइन से बढ़ी परेशानी
मामला सिरगिट्टी क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 12 (बन्नाक मोहल्ला) का है, जहां डेढ़ महीने से नाली निर्माण अधूरा पड़ा है। करीब 10 फीट गहरी खुदाई के बाद काम रोक दिया गया, जिससे पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और जल आपूर्ति बाधित हो गई है। इलाके में गंदगी और जलभराव से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बीमारी का खतरा, कोर्ट ने जताई चिंता
अधूरी नाली में जमा गंदे पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताया।
एक सप्ताह में काम पूरा करने का आदेश
हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर नाली निर्माण पूरा किया जाए, पाइपलाइन दुरुस्त कर जल आपूर्ति बहाल की जाए और पूरे क्षेत्र में सफाई व सैनिटाइजेशन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं।
अगली सुनवाई में देनी होगी रिपोर्ट
कोर्ट ने निगम आयुक्त को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।



