गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के दुटकैया गांव में पुराने विवाद ने रविवार को हिंसक रूप ले लिया। दो समुदायों के बीच हुई झड़प के दौरान आगजनी, पथराव और पुलिस पर हमले की घटनाएं सामने आईं। हिंसा में कम से कम 11 घरों को नुकसान पहुंचा है, जबकि तीन से चार वाहन भी जलकर खाक हो गए। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया, जिसके बाद देर शाम स्थिति पर काबू पाया गया।
जानकारी के अनुसार, यह घटना एक कुख्यात अपराधी अरिफ और उसके दो साथियों द्वारा ग्रामीणों पर किए गए हमले के बाद भड़की। बताया जा रहा है कि अरिफ और उसके साथी हथियारों के साथ गांव में कुछ लोगों पर हमला करने पहुंचे थे। इस घटना से आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीणों ने अरिफ और उसके साथियों के घरों को घेर लिया और उनमें आग लगा दी।
हिंसा के दौरान भीड़ ने पुलिस पर भी पथराव किया, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रायपुर से अतिरिक्त बल बुलाया गया और पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति है और कर्फ्यू जैसे हालात बने हुए हैं।
पुराने अपराध और मंदिर तोड़फोड़ से जुड़ा है मामला
पुलिस के मुताबिक, अरिफ और उसके साथी लंबे समय से क्षेत्र में लूटपाट, मारपीट और धमकी जैसी आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। करीब चार महीने पहले उनके द्वारा की गई लूट और हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी पहले से बनी हुई थी। तीन महीने पहले शिव मंदिर में तोड़फोड़ की घटना के बाद तीनों को गिरफ्तार किया गया था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। इसी पृष्ठभूमि ने विवाद को सांप्रदायिक रंग दे दिया।
एसपी गरियाबंद का बयान
गरियाबंद एसपी वेदव्रत सिरमौर ने बताया, दुटकैया गांव में एक सीरियल अपराधी अरिफ ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर कुछ ग्रामीणों पर हमला किया था। इसके बाद गांव के लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने आरोपियों के घरों में आग लगा दी। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पथराव में कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।”
जांच जारी, शांति बनाए रखने की अपील
पुलिस ने मामले में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय आपराधिक तत्व, कमजोर कानून व्यवस्था और सामाजिक ध्रुवीकरण ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देते हैं। आगे की जांच में घटना से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है।



