पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
रायपुर/छत्तीसगढ़. राजधानी रायपुर की सभी तहसीलों में न्याय बिकता है और इसकी बोली लगाकर ही फैसला सुनाया जाता है। छत्तीसगढ़ के अधिकांश राजस्व न्यायालयों में न्यायिक व्यवस्था की धज्जियां उड़ाती अक्सर ही बहुत भयावह और सनसनीखेज मामला सामने आते है।

जहां बरसों तक कमजोर पीड़ित पक्ष न्यायालय में पेशी दर पेशी अपने हक और सबूतों के आधार पर फैसले का इंतजार करता है पंरतु पैसों के दम पर फैसलों को खरीद लिया जाता है। रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल ना सिर्फ निष्पक्ष समाचारों का संकलन करता है अपितु लोक कल्याण और आमजनों के लिए संघर्षरत भी रहता है।
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ऐसे ही एक और मामले में हमारी टीम राजस्व न्यायालयों में लगातार शासकीय भूमि को भू-माफियों के चंगुल से आजाद करने के लिए संघर्षरत है पंरतु तहसीलदारों ने पैसों के सामने न्याययिक व्यवस्था को कुचल दिया है।

केस – 2 भू-माफियाओं और उनके दलालों ने एक भूतपूर्व सैनिक और राजस्व अमले के साथ सांठगांठ कर फर्जीवाड़ा किया और 5.5 एकड़ की बेशकीमती शासकीय भूमि को करोड़ों रुपए में बेच दिया।

छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ राजधानी रायपुर में बेशकीमती जमीनों में हो रहे फर्जीवाड़ों और मठ-मंदिरों की जमीनों के साथ सरकारी जमीनों की भी अवैध खरीदी बिक्री से करोड़ों के व्यारे-न्यारे हो रहें हैं। भूमाफियाओं और उनके दलालों की एक और कारस्तानी सामने आ गई है।

रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 डिजिटल न्यूज चैनल को समाचार संकलन के दौरान एक विशेष जानकारी प्राप्त हुई। जो की अति गंभीर तौर पर शासन को क्षति सहित शासकीय अभिलेखों में स्पष्ट तौर पर कूटरचना को प्रदर्शित कर रही है। अधिकार अभिलेख पंजी ग्राम ओडका में 1955-56 के अनुसार खसरा क्रमांक 273/1 273/2291/132/2. 322 सहित कई अन्य खसरे अमराई बाग एवं एक बड़े झाड के जंगल के रूप में दर्ज है। वायुसेना में जूनियर आफिसर सार्जेंट पद से दिनांक 30/04/1984 को सेवानिवृति के पश्चात एन.आर.दानी CHH /04/001837 को मध्यप्रदेश सरकार ने विकासखण्ड आरंग के ग्राम ओडका जिला रायपुर में जीवनयापन करने के लिए भूमि आवंटित की थी। ग्राम ओडका, रायपुर में 2.21 हेक्टेयर भूमि लीज / पट्टे पर भूतपूर्व सैनिक को दी गई जमीन सिर्फ जीवनयापन करने हेतु प्रदान की थी ना ही उसे विक्रय का अधिकार था ना ही दान का अधिकार था।

शासकीय अभिलेखों के अनुसार शासन के आदेश क्रमांक म.प्र. शासन, शाखा 2 एक विभाग आदेश क्रमांक 16/1/84-7/2-1 भोपाल, दिनांक-27/06/1984 के अनुसार शासकीय पट्टेदार को भूमि स्वामी हक प्रदान किया गया उल्लेखित है। सेवानिवृत्त दिनांक 30/04/1984 से मात्र दो ही माह के भीतर ही शासकीय भूमि का पट्टा प्राप्त कर लेना एवं शीघ्र ही शासकीय पट्टेदार को भूमि स्वामी हक प्राप्त कर लेना शासकीय अभिलेखो में स्पष्ट तौर पर कुटरचना को प्रदर्शित कर रहा है। इसके पश्चात राजस्व बंदोबस्त के उपरांत खसरा क्रमांक 273/1273/2,291/1.302/2 एवं 322 की संशोधित कर खसरा क्रमांक 181,340,506,511,544 में परिवर्तित कर दिया गया था।

शासन द्वारा पट्टे पर प्राप्त शासकीय भूमि को भूतपूर्व सैनिक और भू-माफियाओं और उनके दलालों ने बिना शासकीय अधिकारियों के जानकारी और बगैर कलेक्टर , रायपुर विक्रय आदेश प्राप्त किये वर्तमान बाजार मूल्य पर कीर्ति माखीजा, यशवंत और गोवर्धन यादव को करोड़ों रुपए लेकर विक्रय कर दिया गया है जो की एक अपराधिक कृत्य है। इस पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर, रायपुर को सितंबर 2023 में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर दी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए तात्कालिक कलेक्टर द्वारा एक उच्च स्तरीय जांच की अनुशंसा कर तात्कालिक अपर कलेक्टर बी.सी.साहू को जांच अधिकारी के रूप में नियुक्ति की गई। चार माह की जांच के बाद जांच अधिकारी ने शिकायत को सही पाया और अपनी रिपोर्ट में कहा कि सक्षम प्राधिकारी कलेक्टर से भूमि विक्रय की अनुमति नहीं ली गई और जांच में शिकायतकर्ता की शिकायत सही पाई गई है। अग्रिम कार्यवाही के लिए जांच प्रतिवेदन कलेक्टर को भेज दी गई।

कलेक्टर ने कार्यवाही के लिए अपर कलेक्टर,एस.डी.एम. और तहसीलदार आरंग को भेज दिया। अब करोड़ों के खेल का दूसरा भाग यहां से शुरू होता है। तात्कालिक अपर कलेक्टर ने तात्कालिक एस.डी.एम. आरंग को पत्र लिखकर आवश्यक कार्यवाही के लिए निर्देशित किया, एस.डी.एम आरंग ने पत्र लिखकर तहसीलदार को निर्देशित कर दिया। उसके बाद तहसीलदार सीता शुक्ला ने डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही तक नहीं की। इसके बाद तहसीलदार सीता शुक्ला का तबादला अभनपुर तहसील कार्यालय हो गया। इसी तहसील के अंतर्गत करोड़ों रुपए का भारत माला प्रोजेक्ट घोटाला हुआ है जिस पर कार्यवाही करते हुए हाल ही में ईडी ने 9 जगहों पर रेड की है। इस तहसील क्षेत्र में रेल की एक परियोजना के अंतर्गत बड़े स्तर पर फिर से भू-अर्जन कार्यवाही जारी है।

इसके बाद आंरग तहसील में तहसीलदार ज्योति मसियारे की पदस्थापना की गई। जुलाई 2025 से पदस्थापना के बाद आज तक वर्तमान तहसीलदार ज्योति मसियारे ने इस केस की फाइल को एक इंच की भी प्रगति दी है। पहले तहसीलदार सीता शुक्ला ने फिर तहसीलदार ज्योति मसियारे ने आदेश को रोक दिया जबकि उनसे वरिष्ठ अधिकारी अपर कलेक्टर ने जांच कर निर्णय दे दिया था कि शासकीय भूमि बगैर कलेक्टर की अनुमति के बाजार भाव में बेचीं गई है। मतलब साफ है कि दोनों महिला तहसीलदारों ने पैसों के एवज में आदेश जारी नहीं किया।
इस पूरे मामले में सबसे ज्वलंत दो प्रश्न है कि
1.सरकारी जमीन की खरीदी-ब्रिक्री शिकायत पर जब जांच अधिकारी ने स्पष्ट कर दिया की बगैर कलेक्टर के अनुमति के जमीन बेचीं गई तो आज दो साल बाद तक उसमें कार्यवाही क्यों नहीं हुई?
2.क्या राजस्व के बड़े अधिकारियों को करोड़ों की सरकारी जमीन की खरीदी-बिक्री में बड़ा लेन-देन भू-माफियाओं और उनके दलालों ने किया है ताकि कार्यवाही से बचा जा सके ?
यक्ष प्रश्न क्या गौरव रायपुर के गौरव को बचा पायेंगे ? क्रमशः पार्ट – 3



