अंबिकापुर। मुख्यमंत्री और पांच मंत्रियों वाले सरगुजा संभाग मुख्यालय में बुनियादी सुविधाओं की पोल खोलने वाली एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है। सड़क सुविधा के अभाव में एक गर्भवती महिला को परिजनों ने झेलगी (कंधे पर उठाकर ले जाने वाला स्थानीय स्ट्रेचर) के सहारे 2–3 किलोमीटर पैदल एंबुलेंस तक पहुंचाया।
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रास्ते में ही शुरू हो गया प्रसव
मैनपाट विकासखंड के ग्राम कदनई के आश्रित गाँव सुगाझरिया में रहने वाली गर्भवती महिला को जब प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तो एंबुलेंस गांव तक पहुंच नहीं सकी। परिजनों ने मजबूरी में झेलगी का सहारा लिया। रास्ते में ही महिला का बच्चा आधा बाहर आ चुका था। जैसे-तैसे एंबुलेंस तक पहुंचाने के बाद उसे बतौली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने सुरक्षित प्रसव कराया। सौभाग्य से जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।
पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने उठाए सवाल
मामला सामने आने के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा—
- “छत्तीसगढ़ में ऐसे 100 से अधिक गाँव हैं जहां आज भी सड़क नहीं है।”
- ग्रामीणों को हर वर्ष इस समस्या का खामियाजा भुगतना पड़ता है।
- शासन-प्रशासन शहरों की सड़कें चमकाने में तो बजट खर्च करता है, लेकिन दूरस्थ गाँवों की पहुंच मार्ग के लिए फंड कई बार नदारद रहते हैं।
सिंहदेव ने इसे सरकार की प्राथमिकताओं और कर्तव्यनिष्ठा पर बड़ा सवाल बताया।
कई गांव अब भी सड़कविहीन
सरगुजा जिले के कई ग्रामीण अंचलों में आज भी पंचायत से मोहल्ले तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है। यह घटना ऐसे इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की बदहाली का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है।



