कांकेर। जिले के पखांजुर में एक चौंकाने वाली लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल के ठीक बगल में उपस्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी द्वारा एक्सपायरी दवाइयों को जलाए जाने से जहरीला धुआं फैल गया। इस धुएं ने स्कूल परिसर को अपनी चपेट में ले लिया, जिसके चलते 8 छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और घबराहट की शिकायत के बाद इन बच्चियों को तुरंत पखांजुर के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। राहत की बात है कि सभी बच्चियां अब खतरे से बाहर हैं और उनका इलाज जारी है।
क्या हुआ था?
घटना आज दोपहर करीब 2 बजे की है, जब उपस्वास्थ्य केंद्र के आरएसओ विवेक बड़ाई ने स्कूल के बेहद करीब खेत में ढेर सारी एक्सपायरी दवाइयों को आग के हवाले कर दिया। इन दवाइयों के जलने से निकला जहरीला धुआं हवा के साथ स्कूल की ओर बढ़ा और देखते ही देखते पूरे परिसर में फैल गया। उस समय स्कूल की कक्षा में करीब 40 बच्चे मौजूद थे। धुएं की चपेट में आने से कई बच्चों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों और चेहरे में जलन जैसी समस्याएं शुरू हो गईं। आनन-फानन में 8 छात्राओं को अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा
सिविल अस्पताल पखांजुर की डॉ. मनीषा मींज ने बताया कि सभी बच्चियों को प्राथमिक उपचार दिया गया है और उनकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। “हमने सभी बच्चों को कड़ी निगरानी में रखा है। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति स्थिर है, और कुछ बच्चे घर भी जा सकते हैं। सभी बच्चियां अब खतरे से बाहर हैं,” डॉ. मनीषा ने कहा।
स्कूल प्रबंधन और परिजनों में आक्रोश
स्कूल की प्राचार्य बुलबुल दास ने इस लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “उपस्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी ने बिना सोचे-समझे स्कूल के इतने करीब दवाइयां जलाईं, जिसके जहरीले धुएं से बच्चों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों और नाक में जलन हुई। यह बेहद गैर-जिम्मेदाराना हरकत है।” परिजनों ने भी इस घटना को गंभीर लापरवाही करार देते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सवालों के घेरे में उपस्वास्थ्य केंद्र
यह घटना उपस्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े करती है। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयों को स्कूल के पास जलाने की इजाजत कैसे दी गई? क्या इसकी कोई मानक प्रक्रिया नहीं थी? स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी लापरवाही से भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन इस मामले की जांच में जुट गए हैं। लोगों का गुस्सा बढ़ता देख जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है। यह घटना एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करती है।



