रायपुर । छत्तीसगढ़ के शिमला कहलाने वाले मैनपाट में प्रस्तावित नए बॉक्साइट खदान को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। नर्मदापुर क्षेत्र के कड़राजा गांव में रविवार को खनन परियोजना पर जनसुनवाई आयोजित की जानी थी, लेकिन इसकी शुरुआत से पहले ही स्थानीय लोगों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए जनसुनवाई स्थल पर लगाए गए टेंट और पंडाल को उखाड़ फेंका।
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विरोध के दौरान जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग और अन्य जनप्रतिनिधियों ने साफ कहा कि “मैनपाट में किसी भी हाल में नया बॉक्साइट खदान नहीं खुलने देंगे.”
130 हेक्टेयर में खदान प्रस्ताव, पर्यावरण और आजीविका का मुद्दा
यह खदान प्रस्ताव मां कुदरगढ़ी एलमुना कंपनी द्वारा तैयार किया गया है। योजना के अनुसार करीब 130 हेक्टेयर क्षेत्र में बॉक्साइट खनन किया जाना है, जिसमें 10 हेक्टेयर से अधिक निजी जमीन शामिल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले तीन दशक से चल रहे बॉक्साइट खनन ने मैनपाट के पर्यावरण पर गंभीर असर डाला है। उनका आरोप है—
- मैनपाट का तापमान लगातार बढ़ा
- जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है
- पर्यावरण असंतुलन से पर्यटन भी प्रभावित
- खनन के बावजूद स्थानीय लोगों की स्थिति में कोई सुधार नहीं
लोगों का कहना है कि अरबों रुपये का खनिज और करोड़ों का राजस्व जाने के बावजूद क्षेत्र आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। मजदूरी के अलावा रोजगार के अन्य अवसर नहीं बनाए गए।
‘मजदूरी और शोषण के अलावा कुछ नहीं मिला’
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खदानों में उन्हें सिर्फ मजदूर बनाकर रखा जाता है, और वहाँ भी समुचित वेतन नहीं मिलता। मजदूरी पाने के लिए उन्हें बार-बार संघर्ष करना पड़ता है।
मदिरा व मांस बांटकर लोगों को रोकने के आरोप
चर्चा है कि जनसुनवाई से पहले रात में खनन कंपनी से जुड़े लोगों ने कुछ माझी जनजाति परिवारों को शराब, मुर्गा और बकरा परोसा ताकि वे नशे की हालत में जनसुनवाई में न पहुँच सकें और विरोध कमजोर हो जाए। ग्रामीण इसे गैरकानूनी हथकंडा बता रहे हैं।



