जामगांव एम। छत्तीसगढ़ की वन सम्पदा को समृद्धि का माध्यम बनाने वाला जामगांव एम का केन्द्रीय प्रसंस्करण परिसर अब हजारों ग्रामीणों की जिंदगी बदल रहा है। 111 एकड़ में फैले इस परिसर में तीन आधुनिक इकाइयाँ – प्रसंस्करण यूनिट, 20 हजार मीट्रिक टन का गोदाम और पीपीपी मॉडल की हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट – मिलकर रोजगार पैदा कर रही हैं, महिलाओं को सशक्त बना रही हैं और संग्राहकों को उनकी मेहनत का पूरा दाम दिला रही हैं।
प्रसंस्करण इकाई-01 में स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह आंवला जूस, कैंडी, लच्छा, बेल मुरब्बा, बेल शरबत, जामुन पल्प और आरटीएस पेय जैसे शुद्ध उत्पाद तैयार कर रही हैं। एक साल में ही 44 लाख रुपये के उत्पाद बिक चुके हैं, जो “छत्तीसगढ़ हर्बल” ब्रांड के नाम से संजीवनी स्टोर और एनडब्ल्यूएफपी मार्ट में उपलब्ध हैं। दूसरी इकाई में बने चार विशाल गोदामों में कोदो, कुटकी, रागी, हर्रा, चिरायता, पलास फूल, साल बीज सहित 15 हजार क्विंटल से ज्यादा वनोपज सुरक्षित रखी जा रही है। दोनों इकाइयों से अब तक 5,200 से अधिक मानव दिवस का रोजगार पैदा हुआ है।

सबसे खास है पीपीपी मॉडल पर स्फीयर बायोटेक के साथ बनी हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट, जिसका लोकार्पण 2025 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वन मंत्री केदार कश्यप ने किया था। छह एकड़ में फैली यह यूनिट गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मुसली, जंगली हल्दी, गुड़मार, अश्वगंधा, शतावरी जैसे औषधीय पौधों से अर्क निकालती है, जिसका उपयोग आयुर्वेदिक दवाइयों और वेलनेस उत्पादों में होता है। कंपनी सीधे संग्राहकों से खरीद रही है, जिससे उन्हें नियमित और उचित मूल्य मिल रहा है।
लघु वनोपज संघ के अधिकारियों का कहना है कि यह परिसर वनोपज की बर्बादी रोकने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का जीता-जागता मॉडल बन गया है। आने वाले दिनों में ऐसे और परिसर प्रदेश के हर संभाग में बनाए जाएंगे, ताकि वन और वनवासी दोनों समृद्ध हों। जामगांव एम की यह सफलता अब पूरे देश के लिए प्रेरणा बन रही है।



