बिलासपुर, 30 मई। Central University : देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में बड़ा साइबर सुरक्षा संकट सामने आया है। विश्वविद्यालय का समर्थ (Samarth) पोर्टल कथित रूप से हैक होने की खबर के बाद छात्रों, अभिभावकों और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पोर्टल हैक होने के साथ ही कुछ परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका भी जताई जा रही है।
विश्वविद्यालय में इस समय यूजी, पीजी और विभिन्न विभागों की सेमेस्टर परीक्षाएं संचालित हो रही हैं। इसी बीच दावा किया गया कि कुछ छात्रों के पास परीक्षा से पहले ऐसे प्रश्नपत्र पहुंचे, जिनमें मौजूद प्रश्न वास्तविक परीक्षा में पूछे गए सवालों से मेल खाते थे। इस दावे के बाद परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
32 विभागों का डेटा प्रभावित होने की आशंका
जानकारी के अनुसार, समर्थ पोर्टल विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा प्रबंधन, छात्र रिकॉर्ड, प्रशासनिक दस्तावेजों और शैक्षणिक गतिविधियों का प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म है। ऐसे में पोर्टल में सेंध लगने की घटना को बेहद गंभीर माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, करीब 32 विभागों से जुड़े प्रश्नपत्र, गोपनीय दस्तावेज और अन्य प्रशासनिक डेटा प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी तक किसी प्रश्नपत्र के लीक होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
छात्रों का निजी डेटा भी खतरे में
पोर्टल पर छात्रों के आधार नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य संवेदनशील जानकारियां उपलब्ध रहती हैं। ऐसे में डेटा लीक की आशंका ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय की लगभग सभी महत्वपूर्ण सेवाएं इसी पोर्टल से संचालित होती हैं। यदि लॉगिन डिटेल्स या व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक हुई तो उसका दुरुपयोग होने का खतरा बढ़ सकता है।
रातों-रात बुलाई गई बैठक
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुक्रवार शाम आपात बैठक बुलाई। बैठक में स्थिति की समीक्षा के बाद पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया गया।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी प्रो. मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि समिति में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ तकनीकी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। कमेटी को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रश्नपत्र लीक या सिर्फ पोर्टल हैक?
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका है। कुछ छात्रों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचने का दावा किया जा रहा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वे दस्तावेज असली थे या फर्जी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि फिलहाल केवल पोर्टल हैक होने की जानकारी सामने आई है। प्रश्नपत्र लीक होने के संबंध में अभी तक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
साइबर सुरक्षा पर उठे सवाल
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब देश में परीक्षा प्रणाली और डिजिटल सुरक्षा को लेकर बहस तेज है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विश्वविद्यालयों के डिजिटल प्लेटफॉर्म सुरक्षित नहीं हैं तो न केवल परीक्षा प्रणाली बल्कि लाखों छात्रों की निजी जानकारी भी खतरे में पड़ सकती है।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन तकनीकी एजेंसियों के साथ मिलकर यह पता लगाने में जुटा है कि समर्थ पोर्टल में सेंध कैसे लगी और क्या किसी गोपनीय परीक्षा सामग्री तक भी पहुंच बनाई गई थी। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे इस पूरे मामले की असल तस्वीर सामने आ सकेगी।



