भिलाई। भारत–रूस मैत्री का प्रतीक और प्रदेश का सबसे बड़ा गार्डन भिलाई मैत्रीबाग अब निजी हाथों में संचालित होने की तैयारी में है। सत्यापित सूत्रों के अनुसार SEL प्रबंधन ने गार्डन और चिड़ियाघर के संचालन के लिए अखबार में इश्तिहार जारी कर दिया है, ताकि इच्छुक संगठन नियमों और शर्तों के अनुसार इसको चला सकें।
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जनप्रतिनिधियों और यूनियन का विरोध
मैत्रीबाग के निजीकरण की खबर सामने आने के बाद यूनियन लीडर्स और जनप्रतिनिधियों ने प्रतिक्रिया दी।
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भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने कहा:
“पब्लिक सेक्टर के निजीकरण में केंद्र सरकार सबसे आगे है। SEL प्रबंधन ने धीरे-धीरे पूरे प्लांट का निजीकरण कर दिया। अब शिक्षा और स्वास्थ्य के बाद एकमात्र गार्डन को भी नहीं छोड़ा जाएगा। मैं इस निजीकरण का विरोध करूंगा।” -
BSP यूनियन सीटू उपाध्यक्ष डी.वी.एस. रेड्डी ने कहा:
“निजी हाथों में गार्डन जाने के बाद जनता पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। इसे बनाने की सोच SEL के उन अधिकारियों की थी जिन्होंने प्लांट का निर्माण किया था। एक अच्छी सोच के साथ बनाया गया यह गार्डन मध्य भारत में अपनी पहचान रखता है। प्राइवेट हाथों में जाने पर यह पहचान खो सकती है।”
मैत्रीबाग की विशेषताएँ और महत्व
- 140 एकड़ में फैला भिलाई मैत्रीबाग 1972 में स्थापित किया गया था।
- गार्डन में स्थित चिड़ियाघर को सफेद बाघों की नर्सरी के रूप में जाना जाता है।
- अब तक यहां से इंदौर, गुजरात, बंगाल और अन्य राज्यों में सफेद बाघ भेजे गए हैं।
- देश-विदेश के पशु-पक्षी और प्राकृतिक सौंदर्य इसे पर्यटकों और वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाते हैं।
लोकतांत्रिक बहस और जनता की प्रतिक्रिया
सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं में चिंता जताई जा रही है कि निजी हाथों में संचालन होने पर प्राइवेट सेक्टर अपनी शर्तों के अनुसार संचालन करेगा और आम जनता के लिए आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।



