कांकेर। जिले में माओवादी गतिविधियों से जुड़े UAPA मामले में भानुप्रतापपुर की विशेष NIA अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 10-10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही तीनों दोषियों पर 3,500-3,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। मामले में अपर लोक अभियोजक टी.एस. यादव ने अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी की।
सर्च ऑपरेशन के दौरान पकड़े गए थे तीनों
मामला 18 मई 2023 का है। पुलिस के मुताबिक, प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन की गतिविधियों से जुड़ी सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने COB चिलपरस और ढूंट्टा से संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया था।
सुरक्षा बल कागबरस, नयापारा और चिलपरस इलाके में तलाशी लेते हुए केसोकोड़ी की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान पहाड़ी जंगल के पास कुछ संदिग्ध लोग भागते दिखाई दिए। जवानों ने घेराबंदी कर तीनों को पकड़ लिया।
पूछताछ में उनकी पहचान पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम, रमेश पुनेम उर्फ बुधरू और पुनऊ राम मंडावी के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार, तीनों प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़े थे और संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते थे।
वॉकी-टॉकी से लेकर माओवादी साहित्य तक बरामद
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की तलाशी के दौरान उनके कब्जे से वॉकी-टॉकी सेट, माओवादी संगठन की चिट्ठियां, नक्सली साहित्य, नगदी, गुलेल, टॉर्च और चाकू समेत अन्य सामग्री बरामद की गई थी।
पुलिस पार्टी की कार्रवाई के दौरान जवानों पर हमला किए जाने की बात भी सामने आई थी। इस घटना में एक जवान के दाहिने हाथ में चोट आई थी।
UAPA समेत कई धाराओं में दर्ज हुआ था केस
मामले में थाना कोयलीबेड़ा में अपराध क्रमांक 08/2023 दर्ज किया गया था। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और UAPA के तहत कार्रवाई की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अंतागढ़ एसडीओपी अमर सिदार को विवेचना अधिकारी नियुक्त किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने मौखिक, दस्तावेजी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए और प्रकरण न्यायालय में पेश किया।
साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने सुनाई सजा
भानुप्रतापपुर के विशेष न्यायाधीश NIA दीपक के. गुप्ता की अदालत ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद तीनों आरोपियों को दोषी माना।
अदालत ने पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम, रमेश पुनेम उर्फ बुधरू और पुनऊ राम मंडावी को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 3,500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया।




