जांजगीर-चांपा : सरकार का दावा है कि स्वास्थ्य सुविधा अब घर-घर तक पहुंचेगी… गरीबों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा… लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण और नगर पंचायत खरौद क्षेत्र में संचालित मोबाइल मेडिकल बस यूनिट को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि बस में सर्दी, खांसी, बुखार और पेट दर्द जैसी सामान्य बीमारियों की दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हैं।
सवाल यह है कि जब मरीजों को जरूरी दवाइयां ही नहीं मिलेंगी, तो घर-घर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने का दावा आखिर कैसे पूरा होगा? करोड़ों रुपये खर्च करने की बात हो, लेकिन मरीज खाली हाथ लौटें, तो जवाबदेही किसकी होगी?
कागजों पर स्वास्थ्य सुविधा, जमीन पर मरीजों की परेशानी! मोबाइल मेडिकल यूनिट का उद्देश्य है कि लोगों को उनके घर के करीब प्राथमिक उपचार और जरूरी दवाइयां मिल सकें। लेकिन शिवरीनारायण और खरौद क्षेत्र की मोबाइल मेडिकल यूनिट को लेकर सामने आई शिकायतें व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं।
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि इलाज कराने पहुंचने वाले लोगों को सर्दी, खांसी, बुखार और पेट दर्द जैसी सामान्य समस्याओं के लिए भी जरूरी दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। अब सवाल उठता है कि आखिर मरीज जाएं तो जाएं कहां? गरीब और जरूरतमंद लोग उम्मीद लेकर मेडिकल बस तक पहुंचते हैं, लेकिन अगर वहां दवाइयां ही उपलब्ध नहीं हों, तो इस सुविधा का लाभ आखिर किसे मिल रहा है?
इस पूरे मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि मोबाइल मेडिकल यूनिट में पदस्थ कर्मचारी ने दवाइयों की कमी को लेकर विभागीय अधिकारियों से मांग की थी। आरोप है कि इसके बाद कर्मचारी का तत्काल स्थानांतरण कर दिया गया और उस पर दबाव बनाया गया। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय पक्ष सामने आना अभी जरूरी है। यदि दवाइयों की कमी बताने वाले कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई हुई है, तो विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि स्थानांतरण का वास्तविक कारण क्या था और मेडिकल यूनिट में दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं पर खर्च होने वाली राशि जनता की गाढ़ी कमाई से आती है। ऐसे में मोबाइल मेडिकल यूनिट के संचालन, दवाइयों की खरीद, स्टॉक और वितरण का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।




