रायपुर। छत्तीसगढ़ में नकली शराब, फर्जी होलोग्राम और दूसरे राज्यों से अवैध शराब की सप्लाई के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इन घटनाओं के बीच आबकारी विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों की कमी और महत्वपूर्ण पदों का अतिरिक्त प्रभार जूनियर अधिकारियों को दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
विभागीय व्यवस्था के मुताबिक बड़े जिलों में उपायुक्त और छोटे जिलों में सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी रहती है। लेकिन वर्तमान में विभाग में एक उपायुक्त और एक सहायक आयुक्त ही उपलब्ध बताए जा रहे हैं, जबकि कई अधिकारी निलंबित हैं। ऐसे में जिला आबकारी अधिकारियों को बड़े जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
21 निलंबित अधिकारी मुख्यालय में अटैच
जानकारी के मुताबिक निलंबित 21 आबकारी अधिकारियों को मुख्यालय से अटैच किया गया है। इन अधिकारियों को करीब 75 प्रतिशत वेतन मिलने की बात सामने आई है। आरोप है कि फिलहाल उन्हें नियमित विभागीय जिम्मेदारी नहीं दी गई है। दूसरी ओर, जिलों में अनुभव की कमी वाले अधिकारियों के हाथ में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां आने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
अलग-अलग जिलों में सामने आए नकली शराब के मामले
कांकेर के भानुप्रतापपुर में आबकारी विभाग और पुलिस की फ्लाइंग स्क्वाड ने कार्रवाई कर 4,409 खाली बोतलें-पौवे, 3,380 नकली ढक्कन और 105 पत्ते स्टीकर-होलोग्राम बरामद किए। मामले में सहायक जिला आबकारी अधिकारी मधुकर श्याम हरित और एक आबकारी उपनिरीक्षक को निलंबित किया गया।
महासमुंद के सरायपाली क्षेत्र में अवैध शराब की जांच के दौरान पुलिस ने एक कंटेनर से 3,229 लीटर से अधिक अंग्रेजी शराब, नकली होलोग्राम और फर्जी छत्तीसगढ़ स्टेट लेबल बरामद किए। मामले में सात आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
सूरजपुर के कुमदा बस्ती में भी ब्रांडेड शराब के नाम पर मिलावट का मामला सामने आया। छापेमारी में करीब 2,500 नकली ढक्कन, 200 नकली रैपर-लेबल और बड़ी संख्या में खाली बोतलें मिलीं। आरोप है कि नामी ब्रांड के रैपर लगाकर मिलावटी शराब तैयार की जा रही थी।
वहीं राजनांदगांव के डोंगरगढ़ क्षेत्र में पुलिस ने कंप्यूटर और प्रिंटिंग मशीनों के जरिए नकली लेबल और होलोग्राम तैयार करने वाले नेटवर्क का खुलासा किया। कार्रवाई में 3 हजार से अधिक नकली लेबल और 3 हजार नकली होलोग्राम स्टीकर जब्त किए गए। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
बड़े जिलों में भी अतिरिक्त प्रभार
विभागीय व्यवस्था के अनुसार रायपुर जिले की कमान आमतौर पर उपायुक्त स्तर के अधिकारी के पास रहती है, लेकिन वर्तमान में सहायक आयुक्त प्रवीण वर्मा को प्रभार दिया गया है। वहीं दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर, रायगढ़, जांजगीर और कोरबा जैसे जिलों में सहायक आयुक्त स्तर के पद की जिम्मेदारी जिला आबकारी अधिकारियों को दी गई है।
इसके अलावा बेमेतरा, कवर्धा, महासमुंद, सुकमा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में जिला आबकारी अधिकारी के पद की जगह सहायक जिला आबकारी अधिकारियों को जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी है।
लगातार सामने आ रहे नकली शराब और फर्जी होलोग्राम के मामलों के बीच सवाल यह है कि क्या विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों की कमी और जिम्मेदारियों के इस तरह के बंटवारे का असर निगरानी व्यवस्था पर पड़ रहा है। हालांकि, इन मामलों के लिए सीधे तौर पर मौजूदा पदस्थापना व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराने की पुष्टि विभागीय जांच से ही होगी।




