घर की सजावट में देवी-देवताओं की तस्वीरें लगाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। लोग अपनी आस्था के अनुसार पूजा घर के साथ-साथ घर के अन्य हिस्सों में भी देवी-देवताओं की तस्वीरें या प्रतिमाएं लगाते हैं। हालांकि, वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में तस्वीर या प्रतिमा लगाने के लिए स्थान और स्वरूप का भी विशेष महत्व बताया गया है। खासतौर पर घर के मुख्य द्वार पर देवी-देवताओं की तस्वीर लगाते समय उनके स्वरूप का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
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मान्यता है कि मुख्य द्वार पर भगवान गणेश की तस्वीर या प्रतिमा लगाना शुभ माना जाता है। वहीं, कुछ देवी-देवताओं के उग्र या रौद्र स्वरूप की तस्वीरें मुख्य द्वार पर लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।
मुख्य द्वार पर गणेश जी की तस्वीर क्यों मानी जाती है शुभ?
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। इसी वजह से घर के प्रवेश द्वार पर भी गणेश जी की तस्वीर या प्रतिमा लगाने को लेकर विशेष धार्मिक मान्यता है।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार पर भगवान गणेश के शांत और प्रसन्न स्वरूप की तस्वीर लगाने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहने की मान्यता है।
भगवान शिव के रौद्र स्वरूप से क्यों बचने की सलाह?
भगवान शिव के शांत और सौम्य स्वरूप की पूजा की जाती है। हालांकि, वास्तु से जुड़ी कुछ मान्यताओं में उनके रौद्र या अत्यधिक उग्र स्वरूप की तस्वीर को मुख्य द्वार पर लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।
मान्यता के अनुसार, घर का प्रवेश द्वार शांत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए यहां देवी-देवताओं के सौम्य और प्रसन्न स्वरूप को अधिक उपयुक्त माना जाता है।
मेन गेट पर शनिदेव की तस्वीर को लेकर क्या है मान्यता?
शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। हिंदू धर्म में उनकी पूजा का विशेष महत्व है। हालांकि, वास्तु की कुछ मान्यताओं के अनुसार शनिदेव की तस्वीर या प्रतिमा को घर के मुख्य द्वार पर लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।
इसका यह अर्थ नहीं है कि घर में शनिदेव की तस्वीर रखना या उनकी पूजा करना अशुभ है। मान्यता केवल मुख्य प्रवेश द्वार पर उनकी तस्वीर लगाने को लेकर सावधानी बरतने से जुड़ी है।
मां काली के उग्र स्वरूप की तस्वीर से भी बचने की मान्यता
मां काली को शक्ति और देवी के उग्र स्वरूप से जोड़ा जाता है। शक्ति उपासना में उनकी पूजा का विशेष महत्व है। हालांकि, वास्तु से जुड़ी कुछ मान्यताओं में मां काली के उग्र स्वरूप वाली तस्वीर को मुख्य द्वार पर लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।
मान्यता के अनुसार, देवी-देवताओं के उग्र स्वरूप की तस्वीरें पूजा स्थल के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं। इसलिए घर के मुख्य द्वार पर उनके शांत, सौम्य और प्रसन्न स्वरूप को प्राथमिकता देने की बात कही जाती है।
क्या ध्यान रखें?
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार पर देवी-देवताओं की तस्वीर लगाते समय उनके स्वरूप के साथ-साथ तस्वीर की दिशा और स्थान का भी ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ये बातें धार्मिक और वास्तु मान्यताओं पर आधारित हैं, जिनका वैज्ञानिक आधार स्थापित नहीं है। आस्था के अनुसार इनका पालन करना व्यक्ति की व्यक्तिगत पसंद और विश्वास पर निर्भर करता है।




