रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने झीरम घाटी मामले में आए हालिया अदालती फैसले और तत्कालीन परिस्थितियों को लेकर सामने आए पूर्व उप मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने झीरम घाटी हमले में सुरक्षा व्यवस्था और कथित खुफिया इनपुट की अनदेखी को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
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डॉ. महंत ने कहा कि झीरम घाटी नरसंहार केवल नक्सली हमला नहीं था, बल्कि इसके पीछे कथित राजनीतिक साजिश की जांच भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं विद्याचरण शुक्ल, नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार सहित 30 से अधिक जवानों एवं कार्यकर्ताओं की जान गई थी।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि क्षेत्र में नक्सलियों की गतिविधियों को लेकर खुफिया इनपुट पहले से मौजूद था। इसके बावजूद जगदलपुर-सुकमा मार्ग के संवेदनशील क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा बल की तैनाती क्यों नहीं की गई, इसका जवाब सामने आना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की ओर से काफिले के प्रस्थान, मार्ग और उसमें शामिल शीर्ष नेताओं की जानकारी डीजीपी से लेकर स्थानीय पुलिस अधिकारियों तक दी गई थी। इसके बावजूद पूरे रूट पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
‘सुरक्षा हटाना महज लापरवाही नहीं’
डॉ. महंत ने कहा कि पूर्व उप मुख्यमंत्री का यह बयान कि संवेदनशील क्षेत्र में कोई सुरक्षा बल मौजूद नहीं था, बेहद गंभीर है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सुरक्षा बलों की तैनाती नहीं थी तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी और सुरक्षा व्यवस्था में यह कमी किस स्तर पर हुई।
उन्होंने कहा कि काफिले की सुरक्षा व्यवस्था में हुई कथित चूक की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव या सुरक्षा बलों की अनुपस्थिति के लिए कौन जिम्मेदार था।
‘अदालती प्रक्रिया से आगे भी जांच जरूरी’
डॉ. महंत ने कहा कि झीरम घाटी हमले से जुड़े अदालती फैसलों के बावजूद घटना के पीछे कथित व्यापक षड्यंत्र की जांच का सवाल अभी बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हमले के वास्तविक कारणों और इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि सुरक्षा वापस लेने, खुफिया इनपुट की कथित अनदेखी और तत्कालीन सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों तथा उच्चस्तरीय पदों पर बैठे लोगों की भूमिका की निष्पक्ष और व्यापक जांच की जाए। डॉ. महंत ने कहा कि झीरम के शहीदों को पूर्ण न्याय तभी मिलेगा, जब घटना के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आएगी।




