जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले मामले में NIA की विशेष अदालत ने आज, 5 सितंबर को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने ट्रायल का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली थी, लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी। अब शेष 10 आरोपियों को अदालत ने दोषी माना है।
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अदालत ने मामले में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की अंतिम दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। बताया गया कि मामले में अभियोजन की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए थे। इसके अलावा घटना से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य भी न्यायालय के सामने प्रस्तुत किए गए थे।
16 सितंबर को सजा का ऐलान
दोषी करार दिए गए आरोपियों को अब कितनी सजा मिलेगी, इसका फैसला 16 सितंबर को होगा। इसी दिन जजमेंट की कॉपी भी अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों को उपलब्ध कराए जाने की जानकारी सामने आई है।
मामले में अंतिम बहस 10 अगस्त को पूरी हुई थी। इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अभियोजन पक्ष ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोप साबित होने की दलील दी थी, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती देते हुए अपने पक्ष में तर्क रखे थे।
सभी 10 आरोपियों के नाम
- प्रमिला कोडियाम उर्फ ज्योति (Pramila Kodiyam @ Jyoti)
- बंजामी उर्फ सन्ना (Banjami @ Sanna)
- अयाता मरकाम / अयाता माड़कम (Ayata Markam)
- मुक्का मंडावी (Mukka Mandavi)
- मड़कामी देवा (Madkami Deva)
- कवासी कोसा (Kawasi Kosa)
- चौतू उर्फ मुन्ना (Chautu @ Munna)
- कोसा कवासी (Kosa Kawasi)
- महादेव नाग (Mahadev Nag)
- सुमित्रा (जिसे बाद में गिरफ्तार किया गया था)
10 दोषी आरोपियों के नाम
अदालत ने जिन 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है, उनमें प्रमिला कोडियाम उर्फ ज्योति, बंजामी उर्फ सन्ना, अयाता मरकाम/अयाता माड़कम, मुक्का मंडावी, मड़काामी देवा, कवासी कोसा, चौतू उर्फ मुन्ना, कोसा कवासी, महादेव नाग और सुमित्रा शामिल हैं। हालांकि, आरोपियों की भूमिका और प्रत्येक के खिलाफ लगाए गए विशिष्ट आरोपों को लेकर अंतिम विस्तृत स्थिति सजा के आदेश और अदालत के विस्तृत निर्णय से और स्पष्ट होगी।
25 मई 2013 को हुआ था बड़ा नक्सली हमला
झीरम घाटी का हमला 25 मई 2013 को हुआ था। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा में आयोजित बड़ी सभा के बाद वापस लौट रही थी। इसी दौरान दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में घात लगाए हथियारबंद माओवादियों ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के काफिले पर हमला कर दिया था।
हमले में कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं समेत 31 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कई सुरक्षाकर्मी और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल थे।
हमले में विद्याचरण शुक्ल गंभीर रूप से घायल हुए थे। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
NIA ने 2014 में दाखिल की थी पहली चार्जशीट
झीरम मामले की जांच NIA को सौंपे जाने के बाद एजेंसी ने 25 सितंबर 2014 को पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें गिरफ्तार किए गए 9 आरोपियों के नाम शामिल थे। इसके बाद दो और संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई और NIA ने 28 सितंबर 2015 को 35 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की।
मामले में गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों के खिलाफ अदालत में सुनवाई चली। इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। वहीं, चार्जशीट में नामजद 33 आरोपी अब भी फरार बताए जाते हैं। इन आरोपों पर NIA की जांच और अदालत के समक्ष पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अब न्यायालय ने ट्रायल में शामिल सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है।




