पंकज विश्वकर्मा,
समाचार संपादक
रायपुर. 2026 की गर्मियों में छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाईगर रिजर्व क्षेत्र में बाघों के अवैध शिकार और उनकी खाल व अंगों की तस्करी का सनसनीखेज मामला एक बेहद ही गंभीर और संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा है। वर्ष 2026 के फरवरी-मार्च के बाद छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों और मध्य भारत के लगभग 400 किलोमीटर लंबे वाइल्डलाइफ कॉरिडोर में शिकारियों के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ था। इस नेटवर्क में वनविभाग के अधिकारी कर्मचारियों, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के स्थानीय रहवासियों सहित पुलिसकर्मियों तक की संलिप्तता सामने आई है।
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आज वन विभाग की एक पत्रकार वार्ता में केबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने पत्रकारों से बातचीत में माना कि इस पूरे मामले के संगठित गिरोह के अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेटवर्क से जुड़े होने की आशंकाएं सही हो सकती है इसलिए इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मंजूरी दी जा रही है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में बाघों के अवैध शिकार से जुड़ी कई प्रमुख बातें निकल कर आई है।
बड़े नेटवर्क का खुलासा और हालिया गिरफ्तारियों में वन विभाग और पुलिसकर्मियों की भी संलिप्तता पाई गई
जून-जुलाई 2026 में छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर वन विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई की थी। महाराष्ट्र पुलिस के एक विशेष शाखा के कांस्टेबल और एक पुलिस मुखबिर को मोटर साइकिल पर दो बाघों की खाल ले जाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों पर भारी संकट
इस मामले की जांच के दौरान इंद्रावती नदी के पास से एक और बाघ की खाल बरामद की गई। इस मामले में अब तक 9 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा गरियाबंद उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और सूरजपुर में भी बाघ की खाल के साथ तस्कर पकड़े गए हैं।

CBI जांच की मांग
मामले की गंभीरता और इसमें अंतरराज्यीय गिरोह व पुलिसकर्मियों के साथ शामिल होने के कारण और अंतराष्ट्रीय नेटवर्क की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ वन विभाग ने इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच की सिफारिश की थी।
शिकारी – बाघों को निशाना क्यों बना रहे हैं?
तस्करों और शिकारियों के निशाने पर बाघों के विभिन्न अंग होते हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में भारी कीमत होती है इसके साथ ही पारंपरिक चिकित्सा और खासकर चीनी और अन्य एशियाई पारंपरिक दवाओं में बाघ की हड्डियों, मांस, खून और दांतों का उपयोग भारी मात्रा में किया जाता है। इन सब के इतर सजावटी सामानों के लिए भी बाघ की खाल, नाखून और मूंछ के बालों का उपयोग किया जाता है। अवैध वन्यजीवों का शिकार एवं व्यापार स्टेटस सिंबल के रूप में भी होता है। छत्तीसगढ़ में अन्य वन्य जीवों की भी तस्करी भारी मात्रा में की जाती है। बाघों के साथ-साथ पेंगुलिन के शेल और उड़ने वाली गिलहरियों का भी शिकार लगातार किया जा रहा है।

संवेदनशील इलाके और चुनौतियाँ400 किमी लंबा कॉरिडोर
बाघों का अवैध शिकार मुख्य रूप से उस कॉरिडोर में हो रहा है जो महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, छत्तीसगढ़ के इंद्रावती, अबुझमाड़, उदंती-सीतानदी और ओडिशा के सुनाबेड़ा जंगलों को जोड़ता है। यह मार्ग बाघों के स्वतंत्र विचरण के लिए बेहद जरूरी है। यह इलाका हाल ही में नक्सल मुक्त क्षेत्र किया गया है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्र लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहे हैं, जिसके कारण वहां वन विभाग की गश्त और बाघों की सटीक गणना करना हमेशा से एक कठिन चुनौती रही है। शासन और प्रशासन की कड़ी कार्रवाई में लापरवाह अधिकारियों पर भी गाज गिरी है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में शिकार की घटनाओं के बाद लापरवाही बरतने के आरोप में रेंजर, डिप्टी रेंजर और फॉरेस्ट गार्ड सहित तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था। हाल ही में विभाग द्वारा एंटी-स्नेयर ऑपरेशन चलाया जा रहा है। जंगलों में बिछाए गए शिकारियों के जालों और फंदों को हटाने के लिए वन विभाग लगातार विशेष अभियान चला रहा है।हाई-टेक सुरक्षा की तैयारियां भी तेज कर दी गई है। हाल ही में संगठित अपराध और अवैध शिकार नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए आधुनिक तकनीकों, खुफिया जानकारी और सीमा पार गश्त को मजबूत किया गया है।




