डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ के प्रज्ञागिरी पहाड़ पर एक बार फिर तेंदुए की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा है। तेंदुए का करीब 1 मिनट 32 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद वन्यजीव प्रेमियों में उत्सुकता बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही तेंदुए की सुरक्षा और उसके प्राकृतिक रहवास को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं।
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डोंगरगढ़ और खैरागढ़ के आसपास के जंगल लंबे समय से तेंदुओं का प्राकृतिक आवास रहे हैं। क्षेत्र में समय-समय पर तेंदुओं की मौजूदगी सामने आती रही है। हालांकि, इस इलाके में मानव-वन्यजीव संघर्ष के साथ-साथ तेंदुओं के अवैध शिकार और उनके शव मिलने की घटनाएं भी चिंता का विषय रही हैं। कई मामलों में तेंदुए की खाल और नाखून के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
लोकेशन वायरल होना बना बड़ी चिंता
तेंदुआ दिखाई देने के बाद उसका वीडियो और लोकेशन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होना अब एक नई चुनौती बनता जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षण से जुड़े लोगों की चिंता है कि लोकेशन सार्वजनिक होने से बड़ी संख्या में लोग तेंदुए को देखने या उसका वीडियो बनाने जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं।
इससे वन्यजीव के प्राकृतिक व्यवहार में खलल पड़ने के साथ उसकी सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है। सबसे गंभीर आशंका यह है कि सोशल मीडिया के जरिए तेंदुए की मौजूदगी की जानकारी अवैध शिकार करने वालों तक भी पहुंच सकती है।
सिर्फ तेंदुआ दिखने पर सक्रियता, संरक्षण की स्थायी योजना कब?
डोंगरगढ़-खैरागढ़ के जंगल जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसके बावजूद सवाल उठ रहा है कि क्या इस क्षेत्र में वन्यजीवों के सुरक्षित रहवास, प्राकृतिक कॉरिडोर और शिकार विरोधी निगरानी के लिए पर्याप्त और दीर्घकालीन व्यवस्था मौजूद है।
क्षेत्र में बांस कटाई और बिगड़े वन क्षेत्रों के सुधार जैसी गतिविधियां होती रही हैं, लेकिन तेंदुए समेत अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए व्यापक रणनीति की जरूरत महसूस की जा रही है।
कैमरा ट्रैप और पेट्रोलिंग को मजबूत करने की जरूरत
तेंदुओं की लगातार मौजूदगी को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में कैमरा ट्रैप, नियमित पेट्रोलिंग और एंटी-पोचिंग निगरानी को मजबूत करना जरूरी है। साथ ही वन्यजीवों की लोकेशन सार्वजनिक करने से पहले उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
जंगलों में बढ़ती ट्रैकिंग, पर्यटन और नाइट स्टे जैसी गतिविधियों को लेकर भी सुरक्षा मानकों पर गंभीरता से विचार करना होगा। आखिर जंगल वन्यजीवों का प्राकृतिक घर हैं और पर्यटन से पहले उनके रहवास और सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सवाल सिर्फ एक तेंदुए का नहीं…
डोंगरगढ़ में हर बार तेंदुआ दिखाई देने के बाद निगरानी और सुरक्षा को लेकर सक्रियता बढ़ती है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सक्रियता सिर्फ तेंदुआ नजर आने तक सीमित रहेगी?
दशकों से तेंदुओं की मौजूदगी, शिकार की घटनाओं और वन्यजीवों की मौत के मामलों के बीच अब डोंगरगढ़-खैरागढ़ के जंगलों के लिए ठोस और दीर्घकालीन संरक्षण योजना की जरूरत है।




