बीजापुर : बारिश का मौसम जहां एक ओर क्षेत्र में हरियाली और राहत लेकर आता है, वहीं बीजापुर जिले के इलमीडी क्षेत्र के गांवों के लिए यह भारी मुसीबतें भी साथ लाता है।
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इलमीडी के आवासपारा-सेमलडोड्डी में इन दिनों शिक्षा के प्रति समर्पण की एक मिसाल और प्रशासनिक अनदेखी की गंभीर तस्वीर एक साथ देखने को मिल रही है। उफनते नाले और तेज बहाव के बावजूद शिक्षक रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं, ताकि बच्चों का भविष्य अंधेरे में न रहे।
पुराने स्टॉप डैम पर बांस का अस्थायी रैंप ही एकमात्र सहारा
आवासपारा-सेमलडोड्डी स्थित प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला में कुल पांच शिक्षक और एक भृत्य पदस्थ हैं। बारिश शुरू होते ही सेमलडोड्डी नाला उफान पर आ जाता है, जिससे स्कूल का संपर्क पूरी तरह कट जाता है।
विकट परिस्थिति में ग्रामीणों ने पुराने स्टॉप डैम के ऊपर बांस की मदद से एक अस्थायी टिकटी/रैंप तैयार किया है। वर्तमान में यही संकरा और खतरनाक ढांचा शिक्षकों के स्कूल तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता बना हुआ है।
एक चूक और सीधा दुर्घटना का खतरा
नाले का जलस्तर बढ़ते ही इस अस्थायी रास्ते को पार करना बेहद भयावह हो जाता है। बांस की गीली सतह, नीचे उफान मारता पानी और उसके बीच मौजूद बड़े-बड़े नुकीले पत्थर हर कदम पर हादसों को न्योता देते हैं।
“हर साल बारिश के दिनों में यही भयावह स्थिति बनती है। नाला उफान पर आने के बाद रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए हम जान हथेली पर रखकर इस नाले को पार करते हैं।”
— अचैया तोर्रेम, स्थानीय शिक्षक
लंबे समय से स्थायी पुल की मांग लंबित
स्थानीय ग्रामीणों और शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से सेमलडोड्डी नाले पर एक स्थायी पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हर मानसून में यह इलाका इसी तरह जानलेवा पुलिया और अस्थायी रैंप के भरोसे रहने को मजबूर रहता है। शिक्षकों का यह जज्बा निसंदेह काबिले-तारीफ है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही शासन की नींद खुलेगी?



