रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के खिलाफ पिछले करीब चार वर्षों से पुलिस, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई जारी है। जांच एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े लोगों और कंपनियों पर लगातार शिकंजा कस रही हैं। अब तक 3800 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियां अटैच, करीब 2000 सिम कार्ड और 1700 बैंक खाते ब्लॉक किए जा चुके हैं। इसके अलावा 22 ऑनलाइन एप पर भी रोक लगाई गई है।
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इसके बावजूद ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए नए नाम और नए डोमेन से सट्टे की आईडी उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आ रही है। जांच से जुड़े दावों के मुताबिक, कार्रवाई के बावजूद इस अवैध कारोबार का कथित दायरा 45 हजार करोड़ रुपए से अधिक तक पहुंच चुका है।
11 चार्जशीट, 72 आरोपी
महादेव सट्टा नेटवर्क से जुड़े मामलों में CBI अब तक 11 चार्जशीट दाखिल कर 72 लोगों को आरोपी बना चुकी है। वहीं अलग-अलग जांच एजेंसियों की कार्रवाई में 116 से अधिक लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें CBI द्वारा 14 और ED द्वारा 12 लोगों की गिरफ्तारी किए जाने का दावा किया गया है।
जांच का दायरा केवल ऑनलाइन सट्टेबाजी तक सीमित नहीं है। एजेंसियां सट्टे से अर्जित कथित अवैध रकम के शेयर बाजार, रियल एस्टेट और विदेशी कंपनियों तक पहुंचने के आरोपों की भी जांच कर रही हैं।
निशांत पिट्टी के 59.60 करोड़ के शेयर अटैच
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने हाल ही में ईजमायट्रिप से जुड़े निशांत पिट्टी के करीब 59.60 करोड़ रुपए मूल्य के शेयर अटैच किए हैं। एजेंसी का आरोप है कि ये शेयर बेटिंग से अर्जित कथित अवैध कमाई से जुड़े हैं। इस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियों की नजर सट्टे की रकम के निवेश और उसे अलग-अलग माध्यमों से खपाने के तरीके पर भी है।
डोमेन बदला, सर्वर बदला… लेकिन सट्टा कारोबार जारी
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कार्रवाई से बचने के लिए ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क संचालक लगातार डोमेन, सर्वर, मोबाइल नंबर और बैंक खाते बदल रहे हैं। किसी वेबसाइट या एप पर कार्रवाई होते ही नए नाम से नया डोमेन तैयार कर दिया जाता है।
अब ‘महादेव बुक’ नाम का इस्तेमाल कथित तौर पर कम किया जा रहा है। इसकी जगह अलग-अलग नामों से नए डोमेन और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए दांव लगवाने की कोशिश की जा रही है।
WhatsApp से Facebook तक… ऐसे पहुंच रही सट्टे की आईडी
बताया जा रहा है कि WhatsApp, Telegram और Facebook जैसे सोशल मीडिया एवं मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर सट्टे की आईडी उपलब्ध कराई जा रही है। संपर्क करने पर यूजर को बैंक खाता नंबर भेजा जाता है। रकम जमा होने के बाद आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया जाता है, जिसके जरिए ऑनलाइन दांव लगाने की सुविधा दी जाती है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबर और बैंक खातों को लगातार बदला जाता है। किसी खाते या नंबर पर कार्रवाई होने के बाद उसकी जगह दूसरे खाते या नंबर का इस्तेमाल शुरू कर दिया जाता है।
म्यूल अकाउंट और दूसरे लोगों के नाम पर सिम का इस्तेमाल
एजेंसियों की जांच में कथित तौर पर यह भी सामने आया है कि सट्टे की रकम के लेन-देन के लिए म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा कई मामलों में दूसरे लोगों के नाम पर जारी सिम कार्ड का उपयोग किए जाने की बात सामने आई है।
जांच के मुताबिक, कुछ मामलों में जिन लोगों के नाम पर बैंक खाते या सिम कार्ड दर्ज हैं, उन्हें कथित तौर पर यह जानकारी तक नहीं होती कि उनके दस्तावेजों और खातों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है।
चुनाव के दौरान हवाला के आरोपों की भी जांच
महादेव सट्टा नेटवर्क का मामला राजनीतिक आरोपों के कारण भी चर्चा में रहा है। जांच एजेंसियों के सामने चुनाव के दौरान 500 करोड़ रुपए से अधिक की रकम विदेश से हवाला के जरिए भेजे जाने के आरोप भी आए हैं। एजेंसियां इन आरोपों और कथित राजनीतिक कनेक्शन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक किसी राजनीतिक व्यक्ति की इस मामले में गिरफ्तारी नहीं हुई है।
चार साल की कार्रवाई, हजारों करोड़ की संपत्तियों पर कार्रवाई और बड़ी संख्या में खातों-सिम पर रोक के बावजूद नए डिजिटल माध्यमों से सट्टेबाजी का सामने आना जांच एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है।




