Ashadha Gupt Navratri 2026: द्रिक पंचांग के अनुसार, आज आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि है। गुप्त नवरात्रि, चैत्र और शारदीय नवरात्रि से भिन्न होती है। इसमें देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों के बजाय मुख्य रूप से 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में तंत्र सिद्धि व गोपनीय पूजा का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दौरान की जाने वाली साधना को जितना गुप्त रखा जाए, उसका फल उतना ही शीघ्र और अधिक प्राप्त होता है।
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गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि पर महाविद्याओं के साथ-साथ माँ दुर्गा और कन्याओं का पूजन करने से विशेष पुण्य और कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं नवमी तिथि पर माँ दुर्गा और कन्या पूजन की पूरी विधि।
माँ दुर्गा की पूजा विधि
प्रातः स्नान व संकल्प: नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
हवन एवं आहुति: पूजा स्थल को पवित्र कर सबसे पहले हवन की तैयारी करें और विधि-विधान से हवन में आहुतियां दें।
मंत्र जाप व भोग: माँ अंबे की विधिवत पूजा-अर्चना करें, उनके सिद्ध मंत्रों का जाप करें और सात्विक भोग अर्पित करें।
आरती: अंत में माँ दुर्गा की धूप, दीप और कपूर से आरती उतारकर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
कन्या पूजन की विधि
शास्त्रों के अनुसार नवमी के दिन 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को देवी का स्वरूप माना जाता है:
कन्या आमंत्रण: प्रातःकाल पूजा के बाद 9 कन्याओं और एक बालक (भैरव स्वरूप) को आदरपूर्वक घर पर आमंत्रित करें।
चरण प्रक्षालन: घर के प्रवेश द्वार पर सभी कन्याओं और बालक के पैर स्वच्छ जल से धोएं और उन्हें आसन पर बैठाएं।
तिलक व श्रृंगार: कन्याओं के माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाएं, कलाई पर मौली (कलावा) बांधें और संभव हो तो चुनरी ओढ़ाएं।
भोग एवं प्रसाद: कन्याओं को पूरी, काले चने, हलवा, सब्जी, खीर तथा फल का सात्विक भोजन कराएं।
दक्षिणा व आशीर्वाद: भोजन के बाद अपनी क्षमतानुसार वस्त्र, उपहार या दक्षिणा देकर उनके चरण स्पर्श करें और आशीर्वाद प्राप्त करें।



