रायपुर। अभनपुर में चल रहे कांग्रेस के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
भाजपा की ओर से कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस के प्रशिक्षण कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जिला अध्यक्षों को ही पार्टी की विचारधारा का प्रशिक्षण देना पड़ रहा है, तो इससे संगठन की स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी और आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है, जिसका असर उसके संगठनात्मक ढांचे पर दिखाई दे रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की मजबूती उसकी स्पष्ट विचारधारा और कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है, लेकिन कांग्रेस का यह प्रशिक्षण शिविर उसके भीतर चल रही संगठनात्मक कमजोरी को उजागर करता है।
भाजपा के इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से पलटवार किया गया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने कहा कि भाजपा नेताओं को कांग्रेस के प्रशिक्षण कार्यक्रम पर टिप्पणी करने के बजाय अपने संगठन और सरकार की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भाजपा सरकार के भीतर ही कई मुद्दों पर असंतोष और मतभेद की स्थिति बनी हुई है।
सचिन पायलट ने कहा कि कांग्रेस का यह प्रशिक्षण शिविर संगठन को मजबूत करने, जिला अध्यक्षों की नेतृत्व क्षमता बढ़ाने और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को जनहित के मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाने और सरकार की नीतियों का जवाब देने के लिए तैयार कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारी के लिए इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है। पायलट ने दावा किया कि भाजपा सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है, इसलिए कांग्रेस कार्यकर्ता जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने की रणनीति सीख रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम देश के कई राज्यों में पहले भी आयोजित किए जा चुके हैं और छत्तीसगढ़ भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा है। उनका कहना था कि पार्टी जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।



