रायपुर। महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां) संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित नहीं होने पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार और एनडीए पर तीखा हमला बोला है।
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बघेल ने कहा कि एनडीए सरकार महिला आरक्षण बिल के समर्थन में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में असफल रही। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वास्तविक महिला आरक्षण का बिल नहीं, बल्कि देश के चुनावी ढांचे में बदलाव का प्रयास था।
उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार की मंशा वास्तव में महिला आरक्षण लागू करने की है, तो 2023 में लाए गए विधेयक को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए। बघेल के अनुसार, महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ना उचित नहीं है, क्योंकि अब तक जनगणना पूरी नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना जनगणना के परिसीमन की प्रक्रिया छोटे राज्यों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो एक महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी कर सकती है, लेकिन जानबूझकर इसमें देरी की जा रही है।
महंगाई पर भी साधा निशाना
बघेल ने बढ़ती महंगाई को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम जनता परेशान है। सीमेंट के दाम बढ़ने से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कई राज्यों में सड़क निर्माण तक ठप पड़ गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए इस तरह के कदम उठा रही है। साथ ही, उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल का नोटिफिकेशन देर रात जारी किया जाना सरकार की जल्दबाजी को दर्शाता है।
चुनावी माहौल में आरोप-प्रत्यारोप
बघेल ने कहा कि देश में चुनावी माहौल के बीच सरकार के फैसले सत्ता में बने रहने की मंशा से प्रेरित लगते हैं, जबकि आम जनता महंगाई और बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है।


