रायपुर। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत आम लोगों को शासकीय विभागों से समय पर जानकारी नहीं मिल पा रही है। जनसूचना अधिकारी जवाब देने में कोताही बरत रहे हैं, जिसके कारण लोग मजबूरन राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर कर रहे हैं।
पिछले तीन वर्षों में राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील के कुल 33,750 मामले पहुंचे, जिनमें से मात्र 2,304 का ही निपटारा हो सका है। अभी भी 31,446 अपीलें लंबित पड़ी हैं। यह स्थिति केवल द्वितीय अपील तक सीमित नहीं है। आयोग में हजारों शिकायतें भी लंबित हैं। कई मामलों में आयोग ने लापरवाही बरतने वाले जनसूचना अधिकारियों पर जुर्माना भी लगाया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है।
स्टाफ की भारी कमी मुख्य वजह
विशेषज्ञों के अनुसार लंबित मामलों के बढ़ते अंबार के पीछे स्टाफ की कमी, सुनवाई में देरी और तकनीकी संसाधनों का अभाव प्रमुख कारण हैं। राज्य सूचना आयोग में अराजपत्रित स्वीकृत पदों की संख्या 58 है, जिनमें से केवल 11 पद भरे हुए हैं और 47 पद अभी भी खाली पड़े हैं। खाली पदों पर कर्मचारी कलेक्टर दर पर काम कर रहे हैं।
आंकड़ों में गंभीर स्थिति
31 दिसंबर 2023 तक द्वितीय अपील के 19,350 मामले लंबित थे।
इसके बाद 30 नवंबर 2025 तक 14,400 नए मामले और जुड़ गए।
कुल 33,750 प्रकरणों में से सिर्फ 2,304 का निराकरण हुआ।
शिकायत प्रकरणों की स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां 22,665 शिकायतों में से मात्र 1,424 का निपटारा हो सका है और 21,000 से अधिक मामले अभी भी लंबित हैं।
जनसूचना अधिकारियों पर लगाया गया जुर्माना
द्वितीय अपील के मामलों में लापरवाह अधिकारियों पर 34.48 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि शिकायतों के निराकरण के दौरान 24.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके बावजूद सुधार नहीं हो रहा है।
किन विभागों में सबसे ज्यादा अपीलें?
जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक सूचना देने में सबसे ज्यादा विवाद और अपील इन विभागों में आईं:
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग : 6,094 मामले
वन विभाग : 2,604 मामले
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग : 1,400 मामले
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग : 779 मामले
अन्य प्रमुख विभागों की स्थिति:
उच्च शिक्षा : 757
स्कूल शिक्षा : 713
जेल एवं गृह : 468
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण : 369
खनिज साधन : 265
उपभोक्ता मामलों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जनवरी 2026 तक राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग और जिला आयोगों में कुल 6,347 मामले लंबित हैं। इनमें राज्य आयोग में 423 और जिला आयोगों में 5,924 प्रकरण लंबित हैं।
पिछले तीन वर्षों (2023-2025) में उपभोक्ता आयोगों में मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है।
उपभोक्ता मामलों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जनवरी 2026 तक राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग और जिला आयोगों में कुल 6,347 मामले लंबित हैं। इनमें राज्य आयोग में 423 और जिला आयोगों में 5,924 प्रकरण लंबित हैं। पिछले तीन वर्षों (2023-2025) में उपभोक्ता आयोगों में मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है।



