नई दिल्ली। 2026 का पहला सूर्य ग्रहण एक एन्युलर सूर्य ग्रहण होगा, जिसे आमतौर पर “रिंग ऑफ फायर” के नाम से जाना जाता है। यह तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी से इतना दूर होता है कि वह सूरज को पूरी तरह ढक नहीं पाता। परिणामस्वरूप चांद के चारों ओर एक पतला और चमकदार छल्ला दिखाई देता है। इस ग्रहण में सूरज का लगभग 96% हिस्सा चंद्रमा द्वारा ढका जाएगा और रिंग ऑफ फायर लगभग 2 मिनट 20 सेकंड तक दिखाई देगी।
भारतीय समय के अनुसार, सूर्य ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगा, मध्य समय शाम 5 बजकर 40 मिनट रहेगा और यह शाम 7 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा। पूरे ग्रहण की अवधि लगभग 4 घंटे 32 मिनट की होगी।
हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। इस दौरान सूरज हमारे देश में हॉराइजन के नीचे रहेगा। इसका मतलब है कि भारत में कहीं से भी इस ग्रहण को देखा नहीं जा सकेगा। इस वजह से भारत में सूतक काल भी नहीं लगेगा, और मंदिर खुले रहेंगे। लोगों को इस दौरान किसी विशेष नियम का पालन करने या गर्भवती महिलाओं को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
रिंग ऑफ फायर का दृश्य मुख्य रूप से दक्षिणी हेमिस्फीयर में देखा जाएगा। इसके अंतर्गत मॉरिशस, तंजानिया, दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे, अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, जैसे अर्जेंटीना और चिली शामिल हैं। ज्योतिष में सूर्य को नेतृत्व, ऊर्जा और आत्मा का प्रतीक माना जाता है। इस बार का ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है।
भारत में रहने वाले लोग इस खूबसूरत खगोलीय घटना को ऑनलाइन या लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से देख सकते हैं। 2026 का अगला सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को होने वाला है।



