पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़. राज्य में 15 नवंबर से धान खरीदी का महाअभियान शुरू किया गया था जिसकी अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित है। पंरतु क्या धान खरीदी महाअभियान अब भष्ट्राचार और घोटालों का महाअभियान बन गया है ? आइये देखते हैं प्रदेश भर से आ रही धान खरीदी की मिडिया रिपोर्ट्स को और समझते हैं क्यों ये एक भष्ट्राचार और घोटालों का महाअभियान बन गया है।
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जिला – रायपुर
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर जिले में ही भारी अनियमितताएँ उजागर हुई है। धान खरीदी केंद्र धरसींवा के ही औचक निरीक्षण और भौतिक सत्यापन के दौरान 735 क्विंटल धान की कमी पाई गई। इसके अलावा भिलाई समिति में लगभग 500 क्विंटल, कुरा समिति में 384 क्विंटल तथा बारटोरी समिति में 448 क्विंटल धान कम पाया गया, जो गंभीर अनियमितताओं, भष्ट्राचार-घोटालो की ओर संकेत करता है।

कुछ समितियों में नियमों के विरुद्ध प्लास्टिक बोरियों से सीधे जूट बोरियों में धान की पलटी की जा रही थी, जबकि नियमानुसार ढेरी लगाकर धान खरीदी किया जाना अनिवार्य है।रायपुर जिले में ही खरीदी प्रभारी द्वारा किस्म वार स्टैक प्लानिंग नहीं की गई थी। साथ ही पूर्व दिवस में खरीदे गए धान की विधिवत स्टैकिंग न कर खाली स्थान में बोरियों को फैलाकर रखा गया था, जो स्पष्ट रूप से निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
जिला – बिलासपुर
अब जब धान खरीदी अंतिम दौर में पहुंच चुकी है,तब भी सैकड़ों किसान अपनी उपज बेचने के लिए प्रशासनिक दर-दर भटकने को मजबूर हैं। यही पीड़ा लेकर दर्जनों किसान बिलासपुर में जनदर्शन के दौरान कलेक्टर के सामने पहुंचे। अपने हाथों में आवेदन और आंखों में आंसू लिए किसान सिर्फ एक ही गुहार लगाते नजर आ रहे थे कि “साहब, हमारा धान तो बिकवा दीजिए।” पीडित किसानों का कहना है कि वे ढाई महीने से ज्यादा समय से पंजीयन की समस्या झेल रहे हैं। एग्रीस्टेट पोर्टल में रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण उनकी धान खरीदी ही नहीं हो पा रही है। दर्जनों किसान पिछले दो महीनों से अधिकारियों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें हर बार सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, समस्या का कोई समाधान नहीं।

जिला – मुंगेली
मुंगेली जिले में ही अभी तक धान खरीदी में 8.14 करोड़ का फर्जीवाड़ा सामने आया है। मुंगेली जिले में धान के अवैध ओवरलोडिंग, फर्जी वाहनों से परिवहन तथा रिसायक्लिंग के गंभीर मामले उजागर हुए हैं। धान उठाव करने वाले वाहनों द्वारा वास्तविक क्षमता से 200 प्रतिशत से लेकर 1116 प्रतिशत तक अधिक ओवरलोडिंग कर अवैध परिवहन किया गया। राइस मिलरों, समिति प्रबंधकों एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा संगठित रूप से यह फर्जीवाड़ा किया गया और 8 करोड़ 14 लाख रुपए से अधिक की आर्थिक क्षति का खुलासा हुआ है।
जानबूझकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए, पीडीएस चावल का वितरण नहीं किया गया, फर्जी वाहन नंबरों के माध्यम से धान का परिवहन दर्शाया गया तथा वास्तविक मात्रा से अधिक धान उठाव दिखाया गया। प्रारंभिक तौर में ही लगभग 11 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी एवं परिवहन में अनियमितता के प्रमाण मिले हैं। नवागांव घुठेरा समिति द्वारा उपलेटा राइस मिल से मिलीभगत कर 74 जीपीएस युक्त एवं 40 से अधिक बिना जीपीएस वाहनों के माध्यम से धान का अवैध परिवहन किया गया। इसी प्रकार, सिंघनुपरी उपार्जन केन्द्र द्वारा एसएस फूड के साथ मिलकर 4,542 क्विंटल धान का बिना जीपीएस वाहन से परिवहन, छटन उपार्जन केन्द्र द्वारा दीपक राइस मिल एवं नवकार मिल के साथ मिलकर 3,589 क्विंटल धान का अवैध परिवहन तथा झगरहट्टा उपार्जन केन्द्र द्वारा वर्धमान राइस मिलर्स के साथ फर्जीवाड़ा किया गया है।
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जिला – सूरजपुर
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी नजदीक आते-आते ही सूरजपुर जिले में सरकारी दावों की सच्चाई सामने आ गई। कलेक्टर एस. जयवर्धन के निर्देश पर कराए गए भौतिक सत्यापन में पहले पांच केंद्रों के बाद चंदौरा, लटोरी और सलका धान उपार्जन केंद्रों पर हजारों धान बोरियों की कमी पाई गई है। इन गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि जिला प्रशासन ने स्वयं की, इससे निगरानी व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

चंदौरा धान उपार्जन केंद्र का सत्यापन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) प्रतापपुर, सीसीबी नोडल अधिकारी, खाद्य निरीक्षक एवं एस.डब्लू.यू.सी स्टाफ की उपस्थिति में किया गया था। भौतिक सत्यापन में 22 स्टैक में कुल 1,52,607 बोरी धान पाया गया, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में 1,54,652 बोरी दर्ज किया गया था। मतलब 2,045 बोरी करीब-करीब 818 क्विंटल धान की कमी उजागर हुई। इसी तरह लटोरी धान खरीदी केंद्र में किए गए भौतिक सत्यापन में 10,919 बोरी करीब-करीब 4,367 क्विंटल धान कम पाया गया। वहीं सलका केंद्र में एस.डी.एम भैयाथान द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में 1,930 क्विंटल धान की कमी पाई गई। सूरजपुर में औचक निरीक्षण एवं भौतिक सत्यापन में लगातार केंद्रों पर धान की कमी मिलना निगरानी तंत्र की विफलता को उजागर करता है।
जिला – सक्ती
सक्ती जिले में पुटीडीह धान खरीदी केंद्र में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां 3200 क्विंटल धान गायब कर, उन बोरियों में मिट्टी-कंकड़ भरकर कर 99 लाख रुपए से ज्यादा का घोटाला और फर्जीवाड़ा किया गया है। जिले के डभरा क्षेत्र के पुटीडीह धान खरीदी केंद्र में भौतिक सत्यापन के दौरान करीब 3200 क्विंटल धान गायब पाया गया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 99 लाख 20 हजार रुपये है।

जांच में चौंकाने वाली बात सामने आई कि धान की इस भारी कमी को छिपाने के लिए देर रात बोरियों में मिट्टी और कंकड़ भरकर वजन बढ़ाया जा रहा था। कई बोरियों में 5 से 10 किलो तक मिट्टी-कंकड़ मिलाया गया था, जबकि कुछ बोरियों में 30 किलो धान के साथ करीब 10 किलो मिट्टी-कंकड़ पाया गया। यह धांधली किसानों के धान को खरीदने के नाम पर सरकारी खजाने की लूट का स्पष्ट मामला है।

31 जनवरी
खैर समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है, लेकिन 31 जनवरी को शनिवार होने के कारण उक्त तिथि में धान बेचने के लिए जारी किए गए टोकन को क्या शासन स्तर से संशोधित किया जाकर 29-30 जनवरी को शिफ्ट कर दिया जायेगा ? हालांकि अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों द्वारा ऑफलाइन टोकन और लिमिट बढ़ाने की मांग की जा रही है। क्या शासन इस पर गौर कर सहानुभूति पूर्वक निर्णय लेगा ?
यक्ष प्रश्न
छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत धान उपार्जन कार्य समितियों के माध्यम से किया जा रहा है। शासन के दावे के अनुसार आई.सी.सी.सी के “सतर्क ऐप” के माध्यम से सभी धान खरीदी केंद्रों की रियल टाइम निगरानी एवं सतत जांच की जा रही है।

फिर क्यों धान खरीदी में कई प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार-घोटाले और फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं, क्या यह धान खरीदी का महाअभियान है या बन चुका है भष्ट्राचार-घोटालो और फर्जीवाड़ों का महाअभियान?



