पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़ : “धान का कटोरा” के नाम से विख्यात छत्तीसगढ़ में आज से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी प्रारंभ हो रही है। राज्य के पहले मुख्यमंत्री और अपने को “सपनों का सौदागर” कहने वाले अजीत जोगी ने कहा था कि “अमीर धरती के गरीब लोग” क्या आज भी वास्तविकता और यथार्थ के धरातल के पैमाने पर खरा उतरता है या इस 25 वर्षों की यात्रा में एक पुराना जुमला बस रह गया है, शोध का विषय है ?

कल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में संपन्न कैबिनेट की बैठक में 2025-26 खरीफ विपणन सीजन के लिये धान की खरीद के महत्त्वपूर्ण उपायों को मंज़ूरी दी है। 2024-25 हेतु स्वीकृत ₹15,000 करोड़ की सरकारी गारंटी का 2025-26 के लिए पुनर्वेधीकरण किया है और विपणन संघ को अतिरिक्त ₹11,200 करोड़ की नई गारंटी भी दी है।

2025-26 खरीफ के लिये धान की खरीद आज 15 नवंबर, 2025 से शुरू होगी, ₹3,100 प्रति क्विंटल दर ये खरीदी 31 जनवरी, 2026 तक चलेगी। इससे राज्य भर के 25 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलेगा। शासन द्वारा कुल 2,739 खरीदी केंद्र पूरे राज्य में स्थापित किये गये है। साथ ही सरकार ने नये और पुराने जूट के बोरे पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता की तैयारी की है ताकि सुव्यवस्थित धान खरीदी,परिवहन और ढुलाई कार्य सुनिश्चित किया जा सके। केन्द्र सरकार ने 2025-26 के दौरान केंद्रीय पूल के लिये छत्तीसगढ़ से 73 लाख मीट्रिक टन चावल खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया है।

किसानों को अपने धान को सहकारी समितियों को बेचने के 6 से 7 दिनों के भीतर भुगतान प्राप्त हो जाये ऐसा भी छत्तीसगढ़ सरकार ने सुनिश्चित किया है और धान की खरीद के लिये प्रति एकड़ 21 क्विंटल की सीमा भी निर्धारित की है। साथ ही सरकार ने 23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में डिजिटल फसल सर्वेक्षण किया है, जिससे धान की खेती वाले क्षेत्रों का मानचित्र यथोचित रूप से सही तैयार हो। इस डेटा को 20,000 गाँवों में सार्वजनिक रूप से सत्यापित भी किया गया है।
प्रौद्योगिकी-आधारित पहल टोकन तुंहर हाथ मोबाइल ऐप के माध्यम से है। यह किसानों को धान बेचने के लिये ऑनलाइन स्लॉट बुक करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे खरीद केंद्रों पर प्रतीक्षा समय और कतारें कम हो। इसके साथ ही बायोमेट्रिक आधारित खरीदी प्रणाली के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि खरीदी केवल सत्यापित और वास्तविक किसानों से ही की जाए। एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से अनिवार्य ई-KYC पंजीकरण, पारदर्शिता बढ़ाने और डुप्लीकेट से बचाव हेतु भी है।
सरकार ने सहकारी समितियों को प्रोत्साहन राशि भी देने की तैयारी की है। जो सहकारी समितियाँ इस सीज़न में शून्य नुकसान या बर्बादी सुनिश्चित करेंगी उन्हें प्रति क्विंटल ₹5 का प्रोत्साहन मिलेगा। मार्कफेड कार्यालय में एक एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र स्थापित किया गया है और ज़िला स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाए गए ताकि खरीद प्रक्रिया की निगरानी की जा सके। ज़िलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रशासनिक अधिकारियों को केंद्र प्रभारी नियुक्त करें और विशेष जाँच दलों का गठन करें, ताकि पड़ोसी राज्यों से धान के अवैध परिवहन को रोका जा सके।
कांग्रेस ने गिनाई गंभीर कमियां – बिना टोकन किसान 15 नवम्बर को कैसे बचेंगे धान? सहकारी बैंकों और सोसायटी में हड़ताल, सरकार जानबूझकर किसानों को परेशान कर रही है
15 नवंबर की धान खरीदी तारीख देने के बाद भी किसानों को टोकन नहीं मिला, सहकारी बैंकों और सोसाइटी में हड़ताल चल रही है। एग्रीस्टेक पोर्टल में किसानों के डाटा नहीं होना सरकार की लापरवाही है, जिसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है।
1,29,000 किसानों ने पंजीयन नहीं करा पाए हैं और पूर्व से 5 लाख हेक्टेयर रकबा लगभग कम हुआ है, मतलब साफ है, सरकार के षड्यंत्र के चलते पंजीयन से वंचित किसान 30 लाख मीट्रिक टन धान बेच नही पायेंगे। उन्हें अपनी फसल औने-पौने दामों में बेचना पड़ेगीं। 3,100 रु. प्रति क्विंटल का दर उन किसानों को नहीं मिलेगी। इससे इन किसानों को अत्यधिक आर्थिक नुकसान होगा। चालू खरीफ सीजन में 2 लाख नये किसानों ने धान उत्पादन किया है, उन्हें भी नुकसान होगा।
कांग्रेस ने पूछें सवाल – कृषि मंत्री बताये धान बेचने वाले किसानों की संख्या 1.29 लाख एवं धान का रकबा 5 लाख हेक्टेयर पिछले साल के मुकाबले कम कैसे हुआ ?
धान बेचने वाले किसानों की संख्या एवं रकबा में हुई कमी पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस ने कहा कि भाजपा की सरकार वादानुसार किसानों से धान खरीदना नहीं चाहती है। कांग्रेस ने कृषि मंत्री से सवाल किए हैं कि एग्रीस्टेक पोर्टल में पूर्व से पंजीकृत 1 लाख 29 हजार किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया। चालू खरीफ सीजन में नये किसान भी पंजीयन नहीं करा पाये। इसी कारण धान बेचने वाले किसानों की संख्या पिछले वर्ष 27 लाख 79,098 थी जो घटकर 26 लाख 49,584 हो गई है, किसानों का धान का रकबा भी षड़यंत्रपूर्वक कम किया गया, पिछले साल 33 लाख 89,983 हेक्टेयर था जो घटकर इस वर्ष 28 लाख 95,154 हेक्टेयर हो गया है, 5 लाख हेक्टेयर रकबा की कटौती की गई है जो धान उत्पादन करने वाले नये 2 लाख किसान, उनका भी पंजीयन नहीं किया गया। उनका रकबा इसके अलावा अलग है। इससे समझ में आता है कि सरकार किसानों को प्रताड़ित कर रही है। इसका जवाब छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री दें।
सहकारी समिति के कर्मचारी हड़ताल में – धान खरीदी प्रभावित होने के आसार हैं.
राज्य में जहां धान खरीदी से जुड़े उपार्जन केंद्रों के प्रबंधक और ऑपरेटर वेतन विसंगति दूर करने की मांग को लेकर हड़ताल पर है। इस हड़ताल की वजह से राज्य में धान खरीदी की तैयारी प्रभावित हो रही है। वहीं कई उपार्जन केंद्रों में बारदाना नहीं पहुंच पाया है। साथ ही कुछ ऐसे भी उपार्जन केंद्र हैं, जहां से विभाग को सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत शासन ने सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों की ड्यूटी उपार्जन केंद्रों में लगा दी है. इसका आदेश भी जारी किया जा चुका है। फड़ प्रभारी के तौर पर सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सेवाएं देंगे तो कंप्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था आउटसोर्सिंग से की जा रही है। इसके अलावा सहकारी बैंकों के कर्मचारी भी अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन और हड़ताल कर रहे हैं।
हालांकि सरकार का दावा है कि अब भी ज्यादातर किसानों ने धान की कटाई नहीं की है। नवंबर माह में धान खरीदी की रफ्तार धीमी रहती है। दिसंबर में यह रफ्तार पकड़ेगी, फिलहाल कम मात्रा में धान खरीदी होने के कारण परेशानी नहीं होने की बात कही जा रही है। परंतु यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में किसानों की परेशानी बढ़ सकती है।



