सूरजपुर। जिले के धान खरीदी केंद्रों में हेराफेरी और गड़बड़ियों के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला भैयाथान तहसील के सारारावां धान खरीदी केंद्र का है, जहां भौतिक सत्यापन में लगभग 2,588 क्विंटल (6,470 बोरी) धान गायब मिला। इसकी बाजार कीमत करीब 80 लाख रुपये आंकी जा रही है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
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धान खरीदी सीजन समाप्ति के करीब होने पर जिला प्रशासन की टीमें केंद्रों का सघन निरीक्षण कर रही हैं। भैयाथान तहसीलदार के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने सारारावां केंद्र का औचक निरीक्षण किया। रिकॉर्ड के अनुसार, चालू खरीदी वर्ष में केंद्र पर 4,842 क्विंटल धान खरीदा गया था, जिसमें से 240 क्विंटल का उठाव हो चुका था। इस हिसाब से केंद्र में 4,602 क्विंटल धान उपलब्ध होना चाहिए था, लेकिन भौतिक गणना में मात्र 3,413 क्विंटल ही मिला।
निगरानी समिति ने समिति प्रबंधक से जवाब तलब किया, लेकिन कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिल सका। इसके बाद औपचारिक शिकायत दर्ज कर केंद्र संचालक के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि किसानों के खातों में फर्जी तरीके से धान बिक्री दर्ज की गई, जबकि वास्तविक खरीदी नहीं हुई।

सूरजपुर जिले में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले रामानुजनगर तहसील के छिंदया धान केंद्र के निरीक्षण में तहसीलदार को करीब 3 हजार बोरी धान कम मिली थी, जिसकी कीमत लगभग 20 लाख रुपये थी। बाद में गठित जांच टीम ने पुनर्गणना कर सब कुछ सही बताया, जिससे प्रशासनिक जांच प्रक्रिया पर ही सवाल उठ गए।
प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन धान खरीदी पर शुरू से गंभीर नजर रखे हुए हैं। मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधि केंद्रों का दौरा कर रहे हैं और निरीक्षण टीमें गठित की गई हैं। बावजूद इसके सूरजपुर में गड़बड़ियों की अलग तस्वीर सामने आ रही है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी और खरीदी के शेष दिनों में व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा। लगातार उजागर हो रहे ऐसे मामले धान खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।



