रायपुर। राजधानी पुलिस ने मंगलवार को ‘ऑपरेशन समाधान’ के तहत दूसरे राज्यों से आए लोगों की व्यापक तस्दीक अभियान चलाया। इस दौरान 1 हजार से ज्यादा लोगों की जांच की गई। यह कार्रवाई रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान और पतासाजी के उद्देश्य से की गई है। शुरुआती जांच में करीब 100 से अधिक ऐसे लोग सामने आए हैं, जो अपने बारे में पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश बॉर्डर क्षेत्र से जुड़े होने की जानकारी दे रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, इन संदिग्धों के पास वैध और संतोषजनक दस्तावेज नहीं मिले हैं, जिससे उनके बांग्लादेशी नागरिक या रोहिंग्या होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस उनके मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच भी कर रही है, ताकि उनकी वास्तविक पहचान और गतिविधियों का पता लगाया जा सके।
जिन 100 से अधिक संदिग्धों की पहचान हुई है, वे मोवा, खमतराई, टिकरापारा और उरला थाना क्षेत्र में रह रहे हैं। ये लोग ऑटो चलाने और मजदूरी जैसे कामों से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। पुलिस ने इन सभी पर कड़ी निगरानी रखने की बात कही है।
पूछताछ में अधिकांश लोगों ने केवल पिछले एक-दो वर्षों में रायपुर आने की जानकारी दी है। पुलिस को यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वे वास्तव में कब से शहर में रह रहे हैं, क्योंकि ज्यादातर ने हाल के वर्षों में आने की बात कही है।
एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह के निर्देश पर सुबह करीब चार बजे शहर के अलग-अलग इलाकों में छापामार अभियान चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व सीएसपी रैंक के अधिकारियों ने किया। बीट वाइज संदिग्धों से पूछताछ के बाद उन्हें दस्तावेजों की जांच के लिए पुलिस लाइन लाया गया, जहां जांच की प्रक्रिया जारी है।



