बस्तर। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संयुक्त ड्राइवर संघ ने आंदोलन की तैयारी तेज कर दी है। संघ ने बस्तर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 12 नवंबर से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। ड्राइवरों के हड़ताल पर जाने से परिवहन व्यवस्था के साथ कई जरूरी सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
राशन से पेट्रोल-डीजल तक सप्लाई पर असर की आशंका
ड्राइवर संघ की हड़ताल का असर कई क्षेत्रों में पड़ सकता है। संघ के मुताबिक, हड़ताल होने पर राशन वितरण, सब्जी मंडी, पेट्रोल-डीजल परिवहन, खनिज ढुलाई और यात्री बसों के संचालन पर असर पड़ सकता है।
इससे रोजमर्रा की आपूर्ति व्यवस्था से लेकर सार्वजनिक परिवहन तक प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि हड़ताल की स्थिति में वास्तविक असर कितना होगा, यह परिवहन सेवाओं में ड्राइवरों की भागीदारी और प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
33 जिलों के पदाधिकारियों की बैठक में फैसला
संघ के मुताबिक, प्रदेश के 33 जिलों के ड्राइवर संघ इस आंदोलन को लेकर एकजुट हैं। रायपुर में हुई 33 जिलों के पदाधिकारियों की बैठक में अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया गया।
ड्राइवरों का कहना है कि इससे पहले भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया जा चुका है। उस समय शासन की ओर से आश्वासन मिला था, लेकिन उनके मुताबिक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसी वजह से अब फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाने की तैयारी है।
मारपीट और झूठे मामलों से सुरक्षा की मांग
संघ का आरोप है कि ड्यूटी के दौरान चालकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनमें मारपीट, झूठे आरोप और सुरक्षा की कमी जैसी समस्याएं प्रमुख हैं।
इसके अलावा ड्राइवरों के लिए ड्राइवर आयोग, वेलफेयर की व्यवस्था और ड्राइवर दिवस घोषित करने जैसी मांगें भी संघ की ओर से उठाई जा रही हैं।
12 नवंबर से पहले समाधान की उम्मीद
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 12 नवंबर से पहले शासन और प्रशासन ड्राइवरों की मांगों पर क्या निर्णय लेता है। यदि बातचीत से समाधान नहीं निकला और संघ अपने फैसले पर कायम रहा, तो बस्तर के साथ प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को भी अनिश्चितकालीन हड़ताल का सामना करना पड़ सकता है।




