स्पेशल रिपोर्ट और इनसाइड स्टोरी
पंकज विश्वकर्मा,
समाचार संपादक
“जाओ विश्वदीप को बोल देना – विष्णु देव साय को बता देना” मुकेश राघव, जिला मत्स्य अधिकारी – बीजापुर

रायपुर/बस्तर. छत्तीसगढ़ का सबसे समृद्ध इलाक़ा कीमती वनसंपदा से आच्छादित बहुमूल्य खनिजों का गर्भगृह, जो बरसों नक्सलवाद के दंश को झेलते हजारों बेगुनाह लोगों की मौत का गवाह रहा है, आज भ्रष्ट अफसरों और रसूखदार राजनैतिज्ञों के चारागाह में तब्दील हो रहा है।

आदिवासी कहिए या वनवासी ये राजनैतिक दलों की अपनी सुविधा और राजनीति के लिए शब्दों की बस एक जादूगरी है। हम इस लड़ाई में नहीं पड़े और बस इन्हें आम “बस्तरिया” संबोधित करे तो शायद किसी को ऐतराज नहीं होगा ? “बस्तरिया” पहले नक्सलियों को लेवी देते थे स्वरूप अलग-अलग रहता था। कभी अपने “नौनिहालों” को, कभी अपने “आश्रय और नीड़” को, तो कभी अपने अनाज और पशु-पक्षियों को। “सहर्ष नहीं, मौत के डर और अपनो को खोने की चिंता से”। अब लेवी का स्वरूप बदल गया है। अब लेवी दी जायेगी “नकद” वो भी केन्द्र और राज्य पोषित योजनाओं से प्राप्त अनुदान राशियों के हिस्से के रूप मे।

आइये आप को रुबरु करते हैं इस नई हकीकत से। बस्तर के दक्षिणवर्ती हिस्से में है बीजापुर जिला इसके सबसे ज्यादा हिंसाग्रस्त इलाकों में शुमार होता था भैरमगढ़ ब्लॉक और ग्राम नेसलनार का हिस्सा। भैरमगढ़ और नेलसनार क्षेत्र में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच कई मुठभेड़ें, IED बरामदगी और बड़े पैमाने पर नक्सलियों के आत्मसमर्पण की घटनाएं हाल ही में लगातार सामने आई हैं।
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अब बात मु्द्दे की केन्द्र सरकार द्वारा ग्रामीणों की आय को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक महात्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ( पीएमएमएसवाई ) है। इसके अंतर्गत पूरे बीजापुर जिले के लिए वर्ष 2025-26 में 5 बायोफ्लाॅक इकाईयों को राज्य सरकार के द्वारा स्वीकृत किया गया। तात्कालिक समय में पूरा जिला नक्सलवाद की अंतिम और निर्णायक लड़ाई लड रहा था। इसी दौरान मत्स्य पालन विभाग में जिला अधिकारी के रूप में मुकेश राघव को पदस्थापना दी गई। नवनियुक्त जिला अधिकारी मुकेश राघव ने वर्ष 2025-26 की इस स्वीकृत इकाईयों को प्रस्ताव आमंत्रित कर वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसी नेलसनार गांव में स्वीकृत कर दिया। इन 5 इकाईयों में से 3 ईकाई सिर्फ एक ही परिवार को आंबटित की गई है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से जिले में 4 ब्लाक है और 300 से ज्यादा भौतिक रूप से विद्यमान गांव है और 250 से ज्यादा विस्थापित गांवों की संख्या है, सरकारी आंकड़ों के हिसाब से। फिर क्यों सिर्फ एक गांव में 5 इकाईयों को स्वीकृत किया गया और उसमें भी एक ही परिवार के 3 सदस्यों को। कारण आप सभी समझते हैं, सिर्फ और सिर्फ “नकद लेवी” के लिए। 5 इकाईयों के लिए कुल अनुदान राशि 45 लाख और प्रत्येक के लिए 9 लाख स्वीकृत थे जिसमें केद्रांश 27 लाख प्रत्येक इकाई के लिए 5,40,000/- है। बाकी अनुदान राज्यांश था। स्वीकृत ईकाई सभी नेलसनार गांव कि है जिसमें एक ही परिवार के तीन सदस्य चेतराम कोरसा, करका कोरसा और चैती कोरसा है। अन्य दो व्यक्ति महेश कुमार कडियाम और जीलू राम कश्यप है।
इसके साथ बीजापुर जिले में मत्स्य विभाग के जिला अधिकारी मुकेश राघव ने अपने पड़ोसी जिले दंतेवाड़ा से स्थांतरित एक कर्मचारी थान सिंह सिन्हा को 15 अगस्त पर पुरूस्कार भी दिला दिया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और कौशल का। जबकि उस कर्मचारी थान सिंह सिन्हा पर स्वयं शासकीय अनुदान प्राप्त हितग्राहियों से लाखों रुपए नकद राशि रिश्वतखोरी के रूप में लेने का आरोप है और इसकी जांच का आदेश स्वयं संचालक, मत्स्य पालन विभाग ने 06/08/2026 को जारी किया था।
आइये इस केस के सबसे महत्वपूर्ण पहलू पर जो परत दर परत भ्रष्ट्राचार की तहो को खोलता है। जिस कर्मचारी थान सिंह सिन्हा पर लाखों रुपए हितग्राहियों से रिश्वतखोरी के रूप में वसूली का आरोप है वहीं भैरमगढ़ ब्लॉक का इंचार्ज है और उसके द्वारा ही नेलसनार गांव में 5 इकाईयों के निर्माण का प्रस्ताव जिला अधिकारी मुकेश राघव को भेजा गया था। जबकि अन्य 3 ब्लाक इंचार्ज ने एक भी प्रस्ताव नहीं दिया जबकि पूरे जिले के लिए सिर्फ 5 बायोफ्लाॅक इकाई स्वीकृत थे।
केन्द्रीय पशुपालन और मत्स्य विभाग ने छत्तीसगढ़ सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मत्स्य पालन और जलीय कृषि के सतत विकास के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) को लागू किया है। पीएमएमएसवाई योजना ने अवसंरचना, उत्पादन, जलीय कृषि विस्तार, प्रौद्योगिकी के समावेश, कल्याणकारी गतिविधियों के लिए समर्थन, बाजार विस्तार और कल्याणकारी हस्तक्षेपों के माध्यम से मछुआरों और मछली पालकों की वित्तीय, सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ाकर छत्तीसगढ़ में मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारत सरकार के मत्स्य विभाग ने पिछले छह वर्षों (2020-21 से 2025-26) के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार को पीएमएमएसवाई के तहत 956.86 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 321.01 करोड़ रुपये था। स्वीकृत केंद्रीय हिस्से में से, पिछले छह वर्षों (2020-21 से 2025-26) में छत्तीसगढ़ सरकार को 274.16 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने मानसून सत्र 2026 में राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी थी।

खैर इस विषय पर पर जब हमारे द्वारा जिला मत्स्य पालन अधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा “मेरे पास जहां से प्रस्ताव आया, मैंने स्वीकृत कर दिया। जिसको जहां शिकायत करना है कर लो। जाओ विश्वदीप को बोल देना-विष्णु देव साय को बता देना”। हमारी हैसियत तो है नहीं कि हम कलेक्टर साहब या मुख्यमंत्री जी को इस भाषा में बता भी दे, बस सत्य और तथ्य को सामने रख रहे हैं।
“शायद आम बस्तरिया के नसीब में ही जीवन भर लेवी और गुलामी लिखीं हुई है” ??




