नई दिल्ली : देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के मामलों पर जारी भारी घमासान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। पीएम मोदी ने पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई और दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ (विशेष अदालतों) के गठन के निर्देश दिए हैं। अब इन मामलों का निपटारा जल्द से जल्द इसी अदालत के जरिए किया जाएगा।
सोश मीडिया प्लेटफॉर्म ’X’ (पूर्व में ट्विटर) पर इसकी जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा, “देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। केस के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित होगी।”
“युवाओं से बढ़कर हमारे लिए कुछ नहीं है। विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा के लिए यह एक बड़ा कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।”
– नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
एनडीए बैठक में कहा था- ‘पेपर लीक घोर पाप’
इससे पहले 21 जुलाई को हुई एनडीए संसदीय दल की बैठक ‘मंगल मिलन’ में भी प्रधानमंत्री ने नीट (NEET) पेपर लीक का प्रमुखता से जिक्र किया था। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को बताया कि प्रधानमंत्री ने इस पूरी घटना को ‘घोर पाप’ करार देते हुए कहा कि सरकार छात्रों का भविष्य खराब नहीं होने देगी। पीएम ने बताया कि मामला सामने आते ही 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की गई। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम के निर्देश दिए गए हैं।
जंतर-मंतर से संसद तक विपक्ष का जोरदार हंगामा
पेपर लीक के मुद्दे पर पिछले करीब एक महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन चल रहा है, जिसे कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का समर्थन हासिल है। संसद के मौजूदा मानसून सत्र में भी इस मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष इस विषय पर सदन में अलग से चर्चा कराने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार हंगामा कर रहा है। सरकार के इस ताजा फैसले को विपक्ष के हमलों और छात्रों के आक्रोश के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।




