रायपुर, 19 जुलाई। NFHS-6 Report : छत्तीसगढ़ के लिए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के मोर्चे पर राहत भरी खबर है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में डिलीवरी) बढ़कर 86.9% तक पहुंच गया है। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 94.6% है, जो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। हालांकि, इसी रिपोर्ट ने एक गंभीर चिंता भी सामने रखी है—निजी अस्पतालों में 64.9% प्रसव सी-सेक्शन (ऑपरेशन) से हो रहे हैं, जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ अनावश्यक ऑपरेशन की बढ़ती प्रवृत्ति बता रहे हैं।
राष्ट्रीय औसत से अब भी पीछे
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछली तुलना में संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है। NFHS-5 में 85.7% से बढ़कर NFHS-6 में यह 86.9% पहुंचा है, यानी सिर्फ 1.2 प्रतिशत अंक की वृद्धि। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ अभी भी राष्ट्रीय औसत 90.6% से 3.7 प्रतिशत अंक पीछे है।
जिलों के बीच बड़ा अंतर
प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं की तस्वीर एक जैसी नहीं है। बालोद और दुर्ग जैसे जिलों में संस्थागत प्रसव 95% से अधिक है। वहीं बस्तर और बीजापुर जैसे आदिवासी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 65% के आसपास है, जो स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की चुनौती को दिखाता है।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि निजी अस्पतालों में बढ़ते सी-सेक्शन का मतलब यह नहीं कि सभी ऑपरेशन चिकित्सकीय रूप से आवश्यक थे। अनावश्यक ऑपरेशन से मरीजों का खर्च बढ़ता है और मां-बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर अतिरिक्त जोखिम भी हो सकता है।
रिपोर्ट में सुझाए गए उपाय
- 80% से कम संस्थागत प्रसव वाले जिलों के लिए 6 महीने का विशेष अभियान।
- हर गर्भवती महिला के लिए बर्थ प्रिपेयर्डनेस प्लान, जिसमें अस्पताल, वाहन, ब्लड ग्रुप और संपर्क पहले से तय हों।
- निजी अस्पतालों में सी-सेक्शन ऑडिट, ताकि केवल चिकित्सकीय आवश्यकता होने पर ही ऑपरेशन किए जाएं।



