रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को प्लास्टिक प्रदूषण का मुद्दा प्रमुखता से उठा। पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर प्लास्टिक के बढ़ते दुष्प्रभावों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष ने समान रूप से चिंता जताई। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर इस विषय पर अशासकीय संकल्प लेकर आए, जिस पर हुई चर्चा के दौरान सभी दलों ने प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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चर्चा के दौरान पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण आज केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया के सामने गंभीर चुनौती बन चुका है। उन्होंने बताया कि सरकार प्लास्टिक के उपयोग को नियंत्रित करने, उसके सुरक्षित निपटान और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) की व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। मंत्री ने कहा कि उनके आश्वासन के बाद भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने अपना अशासकीय संकल्प वापस ले लिया।
ओपी चौधरी ने कहा कि प्लास्टिक कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा। साथ ही लोगों में जागरूकता लाने के लिए विशेष अभियान चलाने की योजना है, ताकि सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम किया जा सके और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में इस दिशा में और कड़े कदम उठाए जाएंगे।
चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने भी प्लास्टिक प्रदूषण को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग जल, भूमि और पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्लास्टिक पैकेजिंग में शराब की बिक्री जैसे मामलों पर भी गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है।
उमेश पटेल ने कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है, जबकि उसके समुचित निपटान की व्यवस्था अभी भी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और पुनर्चक्रण को बढ़ावा दिया जाए। सड़क निर्माण जैसे कार्यों में प्लास्टिक अपशिष्ट के उपयोग की संभावनाओं पर भी उन्होंने जोर दिया।
विधायक ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं रुकेगा, बल्कि इसके लिए जनभागीदारी और व्यापक सामाजिक जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने इस मुद्दे को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर बताते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए।
सदन में हुई चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष इस बात पर सहमत नजर आए कि प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए प्रभावी नीति, सख्त अमल और जनजागरूकता तीनों जरूरी हैं। विधानसभा में इस विषय पर बनी सहमति को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक पहल माना जा रहा है।



