रायगढ़, 11 जुलाई। Adani Power Raigarh : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अडानी पावर लिमिटेड के प्रस्तावित 1600 मेगावाट (2×800 MW) फेज-III विस्तार प्रोजेक्ट को लेकर बहस तेज हो गई है। कंपनी ने इस परियोजना को रोजगार और औद्योगिक विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया है, जबकि स्थानीय स्तर पर प्रदूषण, स्वास्थ्य और रोजगार को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
कंपनी के प्रस्ताव के अनुसार, इस विस्तार के बाद संयंत्र की कुल क्षमता 3800 मेगावाट हो जाएगी। करीब ₹15,792 करोड़ की लागत वाली परियोजना के लिए 185 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी। पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट EIA (Environmental Impact Assessment) और EMP (Environmental Management Plan) रिपोर्ट भी संबंधित प्राधिकरण को सौंपी जा चुकी है।
समाजसेवी ने लगाए गंभीर आरोप
समाजसेवी राजेश त्रिपाठी ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि क्षेत्र में पहले से संचालित उद्योगों के कारण प्रदूषण बढ़ा है और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं दिया जाता और बाहरी राज्यों से श्रमिक लाए जाते हैं। उन्होंने जल स्तर, वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर भी चिंता जताई तथा प्रशासन से इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की।
कंपनी का दावा
परियोजना से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, निर्माण अवधि में 6,230 और संचालन के दौरान 1,772 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है। कंपनी का कहना है कि परियोजना आधुनिक अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी।
जनसुनवाई पर टिकी निगाहें
परियोजना को लेकर प्रस्तावित जनसुनवाई पर अब सभी की नजरें हैं। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों द्वारा अपनी-अपनी चिंताएं और सुझाव रखे जाने की संभावना है। वहीं, पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का आकलन संबंधित वैधानिक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
परियोजना अभी पर्यावरणीय स्वीकृति और जनसुनवाई की प्रक्रिया में है। अंतिम मंजूरी संबंधित वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही दी जाएगी।



