दुर्ग। दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित 20 वर्षीय युवती की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में इलाज और ब्लड उपलब्ध कराने में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद 2 डॉक्टरों समेत 7 स्वास्थ्यकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया गया है। इनमें 4 संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि 3 अन्य के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।
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मृतका दीपिका गाड़ा भिलाई के मरोदा क्षेत्र की रहने वाली थी। 30 मई की रात उसकी तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच में उसका हीमोग्लोबिन करीब 5.5 ग्राम पाया गया और तत्काल ब्लड चढ़ाने की जरूरत बताई गई। परिजनों का आरोप है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे तत्काल डोनर की व्यवस्था नहीं कर सके और अस्पताल से कम से कम एक यूनिट ब्लड देने की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें मदद नहीं मिली। इलाज के दौरान 1 जून को दीपिका की मौत हो गई।
जिला प्रशासन की जांच में खुलासा हुआ कि अस्पताल के ब्लड बैंक में 85 यूनिट रक्त उपलब्ध था और फीमेल वार्ड से ब्लड बैंक की दूरी महज 30-40 कदम थी। इसके बावजूद ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने ब्लड बैंक से रक्त लाने की पहल नहीं की और न ही डोनर उपलब्ध नहीं होने की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर रेडक्रॉस सोसायटी के लैब टेक्नीशियन तरन्नुम जहां और निगार परवीन, तथा एनएचएम की स्टाफ नर्स जागेश्वरी देवी और तनुजा चंद्राकर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। वहीं नियमित स्टाफ नर्स अनसतसिया केरकेट्टा, पीजी रेजिडेंट डॉ. निखिल अग्रवाल और विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. तृप्ति तिवारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए उनके नियुक्तिकर्ता को पत्र भेजा गया है।



