रायपुर। एनसीईआरटी की कक्षा 9वीं की नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल (इमरजेंसी) से जुड़े विषयों को शामिल किए जाने पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। रायपुर पहुंचे मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने इस मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बच्चों की शिक्षा और पाठ्यक्रम को राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया जा रहा है।
यह भी पढ़े :- NCERT ने कक्षा 9 के सिलेबस में जोड़ा ‘Emergency’ चैप्टर, छात्रों को पढ़ाया जाएगा भारतीय लोकतंत्र का अहम दौर
बिलासपुर में आयोजित कांग्रेस के राष्ट्रीय अभियान ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने छत्तीसगढ़ पहुंचे जयवर्धन सिंह ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन स्कूली शिक्षा और बच्चों के भविष्य को राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रभावित करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इतिहास और शिक्षा को अपने नजरिए से प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है।
शिक्षा और परीक्षाओं के मुद्दे पर सरकार को घेरा
कांग्रेस विधायक ने कहा कि देशभर में शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल है। इसी उद्देश्य से कांग्रेस ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के जरिए विभिन्न राज्यों में जनजागरण कार्यक्रम चला रही है।
उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता लाने की मांग की।
उच्च शिक्षा और युवाओं के भविष्य पर चिंता
जयवर्धन सिंह ने दावा किया कि देश में उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार और युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने में कांग्रेस सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में परीक्षाओं की निष्पक्षता और शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब सरकार को देना चाहिए।
सचिन पायलट ने भी जताई आपत्ति
वहीं, एनसीईआरटी की नई पुस्तक में इमरजेंसी से जुड़े अध्यायों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इतिहास को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखा और समझा जा सकता है, लेकिन उसकी प्रस्तुति संतुलित और निष्पक्ष होनी चाहिए।
सचिन पायलट ने कहा कि किसी भी सरकार का अपना नजरिया हो सकता है, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में कई संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिन पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।



