बिलासपुर/रायपुर, 18 जून। Uzbekistan Women Deportation : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर सेंट्रल जेल परिसर स्थित डिटेंशन सेंटर में बंद उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं को उनके देश वापस भेजने का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उज्बेकिस्तान दूतावास समेत सभी संबंधित पक्ष डिपोर्टेशन के पक्ष में हैं, ऐसे में याचिका पर आगे विचार करने का कोई औचित्य नहीं बचता। हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोनों महिलाओं को उज्बेकिस्तान भेजने की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
पासपोर्ट-वीजा नहीं दिखा सकीं
मामला 9 जनवरी 2026 का है, जब रायपुर के होटल एरिना बुटिक में दो विदेशी युवतियों के ठहरे होने और उनकी गतिविधियां संदिग्ध होने की सूचना पर तेलीबांधा पुलिस ने दबिश दी थी। जांच के दौरान दोनों महिलाएं पासपोर्ट, वीजा अथवा भारत में वैध रूप से रहने से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकीं।
पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर रायपुर सेंट्रल जेल परिसर स्थित डिटेंशन सेंटर में रखा। पूछताछ के दौरान करीब तीन महीने तक उन्होंने अपनी पहचान और यात्रा संबंधी जानकारी साझा नहीं की। इसके बाद 13 मार्च 2026 को उनके खिलाफ आव्रजन एवं विदेशी विषयक अधिनियम-2025 की धारा 3, 21 और 23 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उज्बेकिस्तान दूतावास ने अदालत को अवगत कराया कि दोनों महिलाओं को उनके देश वापस भेजने की कार्रवाई की जा सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने माना कि सभी संबंधित पक्षों की सहमति होने के कारण बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को लंबित रखने का कोई कारण नहीं है।
अदालत के आदेश के बाद अब संबंधित एजेंसियां यात्रा दस्तावेज तैयार करने, पहचान सत्यापन और दूतावास के साथ समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया पूरी करेंगी। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों महिलाओं को उज्बेकिस्तान भेजा जाएगा। बताया जा रहा है कि रायपुर जेल में वर्तमान में विभिन्न देशों के कुल 10 विदेशी नागरिक निरुद्ध हैं और इस आदेश के बाद अन्य मामलों में भी डिपोर्टेशन प्रक्रिया तेज हो सकती है।



