दुर्ग, 04 जून। Suspended CEO vs Ex CM : दुर्ग जनपद पंचायत के निलंबित मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) रूपेश कुमार पांडेय की पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। इस मुलाकात को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सवाल खड़े किए हैं, जबकि रूपेश पांडेय ने इसे व्यक्तिगत और सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया है।
हाल ही में आचरण संबंधी मामले में निलंबित किए गए रूपेश पांडेय सोमवार को दुर्ग में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलने पहुंचे। मुलाकात का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद भाजपा ने इसे लेकर राजनीतिक टिप्पणी शुरू कर दी। भाजपा नेताओं का कहना है कि इस मुलाकात से कई सवाल खड़े होते हैं, वहीं पांडेय का दावा है कि इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
रूपेश पांडेय ने कहा कि उनका भूपेश बघेल से पुराना परिचय है। वे पहले पाटन जनपद पंचायत में भी पदस्थ रह चुके हैं, जिसके चलते दोनों के बीच वर्षों से संपर्क रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्व मुख्यमंत्री के दुर्ग आगमन की जानकारी मिलने पर उन्होंने केवल शिष्टाचार मुलाकात की थी और इसका किसी राजनीतिक गतिविधि या संगठनात्मक कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं है।
निलंबन की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए पांडेय ने कहा कि उन्हें काफी समय से निशाना बनाया जा रहा था। उनका आरोप है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई एकपक्षीय है और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने विभाग को अपना जवाब प्रस्तुत किया था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया।
पांडेय ने यह भी संकेत दिए कि वे अपने निलंबन को कानूनी चुनौती देंगे। उनके अनुसार सबसे पहले वे मुख्य सचिव के समक्ष अपील करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
इधर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने सोशल मीडिया पर मुलाकात का वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए और किसी भी प्रकार की राजनीतिक निकटता उनके कार्यों पर प्रभाव नहीं डालनी चाहिए। भाजपा का दावा है कि इस मुलाकात ने कई संदेहों को और मजबूत किया है।
विवाद के केंद्र में सामुदायिक भवन निर्माण से जुड़ा मामला भी है। रूपेश पांडेय का कहना है कि जिस भवन निर्माण को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसमें किसी प्रकार का वैधानिक अवरोध नहीं था। उन्होंने दावा किया कि संबंधित प्रकरण में पूर्व में लगा स्थगन आदेश समाप्त हो चुका था, जिसके बाद नियमानुसार निर्माण कार्य पूरा कराया गया और भुगतान जारी किया गया।
पांडेय ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को भी अधूरा बताया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक किए गए वीडियो का केवल एक छोटा हिस्सा दिखाया गया है, जबकि पूरी रिकॉर्डिंग में घटनाक्रम का अलग संदर्भ मौजूद है। उनके अनुसार पूरी बातचीत सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल निलंबन, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और पूर्व मुख्यमंत्री से मुलाकात को लेकर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।




