रायपुर। राजधानी रायपुर के तेजी से विकसित हो रहे खम्हारडीह क्षेत्र में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। बढ़ती आबादी के अनुरूप जलापूर्ति व्यवस्था का विस्तार नहीं होने से हजारों परिवार सालभर पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगरोत्थान योजना के तहत करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से पानी टंकी निर्माण और पाइपलाइन विस्तार परियोजना को मंजूरी तो मिल चुकी है, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी के कारण योजना अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
जानकारी के मुताबिक प्रस्तावित पानी टंकी के लिए चयनित भूमि महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन है। निर्माण कार्य शुरू करने के लिए विभागीय अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) आवश्यक है, लेकिन अब तक इसकी स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इसके चलते परियोजना पूरी तरह अटकी हुई है और क्षेत्रवासियों को राहत मिलने की उम्मीद लगातार टल रही है।
इस परियोजना का लाभ केवल खम्हारडीह तक सीमित नहीं है। टंकी निर्माण और पाइपलाइन विस्तार के बाद सेल्स टैक्स कॉलोनी, अवंती विहार और शंकर नगर के कुछ हिस्सों सहित आसपास के कई क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत होने की संभावना है। लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से इन इलाकों के नागरिक भी प्रभावित हो रहे हैं।
फिलहाल नगर निगम प्रभावित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए टैंकरों का सहारा ले रहा है। खम्हारडीह और आसपास की बस्तियों में प्रतिदिन पांच टैंकरों के जरिए करीब 50 चक्कर लगाकर पानी पहुंचाया जा रहा है। इसके बावजूद मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कई कॉलोनियों में भूजल स्तर गिरने के कारण लोग निजी टैंकरों पर निर्भर हैं, जिससे उनके खर्च में भी बढ़ोतरी हो रही है।
नगरोत्थान योजना के तहत परियोजना को मार्च में स्वीकृति मिली थी। अप्रैल में भूमिपूजन की तैयारी भी कर ली गई थी और 23 अप्रैल की संभावित तिथि तय की गई थी, लेकिन एनओसी नहीं मिलने के कारण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा।
अब मानसून की दस्तक के बीच स्थिति और जटिल हो गई है। यदि निकट भविष्य में अनुमति मिल भी जाती है, तो भारी बारिश के दौरान नींव और प्रारंभिक निर्माण कार्य शुरू करना मुश्किल होगा। ऐसे में परियोजना का कार्य मानसून के बाद ही शुरू होने की संभावना है, जिससे इसकी समयसीमा और आगे खिसक सकती है।
स्थानीय वार्ड पार्षद पुष्पा रोहित साहू ने कहा कि यदि समय पर विभागीय अनुमति मिल जाती तो मानसून से पहले निर्माण कार्य शुरू हो सकता था। अब देरी का सीधा असर क्षेत्र के हजारों परिवारों पर पड़ रहा है।
वहीं नगर निगम के जलकार्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एनओसी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। विभागीय स्तर पर लगातार पत्राचार किया जा रहा है और अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जाएंगे।