रायगढ़ : प्यार के लिबास में बुनी गई फरेब की एक ऐसी खौफनाक साजिश, जिसने न केवल एक हिंदू महिला की अस्मत, आस्था और वजूद को तार-तार कर दिया, बल्कि देश की जड़ों में भी मजहबी कट्टरपंथ और राष्ट्रद्रोह का जहर घोलने का काम किया है।
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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से ‘लव जिहाद’, जबरन धर्मांतरण, क्रूरतम घरेलू हिंसा और नार्को-टेररिज्म के गठजोड़ का एक ऐसा दहला देने वाला हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया है, जो किसी भी सभ्य समाज और राष्ट्रभक्त नागरिक की रूह कंपा देने के लिए काफी है। इस साजिश की इंतहा उस वक्त हो गई, जब मादक पदार्थों की तस्करी के जुर्म में जेल की हवा खा रहे आरोपी पिता ने अपने ही पांच वर्षीय मासूम बेटे के जेहन में देश के खिलाफ नफरत का बीज बोना शुरू कर दिया। मासूम को ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे रटाए गए। गुरुवार को मौत के खौफ और अपने बच्चों के भविष्य की चिंता में घिरी पीड़िता अपने दो मासूमों के साथ रायगढ़ के महिला थाने पहुंची। उसने पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से न्याय की गुहार लगाते हुए अपनी उस खौफनाक दास्तान का पर्दाफाश किया है, जिसने समूचे प्रशासनिक महकमे और खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।
पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत और मीडिया के समक्ष दिए गए बयानों के मुताबिक, मूल रूप से कोरबा जिले की रहने वाली इस हिंदू युवती का विवाह वर्ष 2021 में रायगढ़ के इंदिरा नगर निवासी वसीम मोहम्मद के साथ हुआ था। आरोपी ने एक सोची-समझी और शातिराना साजिश के तहत महिला को अपने प्रेम जाल में फंसाया। निकाह से पूर्व वसीम ने यह सफेद झूठ बोला था कि वह तलाकशुदा है और उसके केवल दो बच्चे हैं। लेकिन हकीकत में, उसकी पहली पत्नी उसके साथ ही थी और वह पांच बच्चों का पिता था। पीड़िता का दर्द छलकते हुए सामने आया कि निकाह के बाद और पहले बच्चे के जन्म तक आरोपी ने एक आदर्श पति होने का फरेबी मुखौटा ओढ़े रखा। लेकिन जैसे ही महिला अपने मायके और हिंदू समाज से पूरी तरह कट गई, लव जिहाद का खौफनाक अध्याय शुरू हो गया।
हिंदू धर्म छोड़कर आई महिला के लिए उसका नया घर एक ऐसा यातना शिविर बन गया, जहां उसकी सांसों पर भी मजहबी पहरा था। महिला पर इस्लामी कट्टरपंथ थोपते हुए उसकी मूल पहचान मिटाने का भारी मानसिक व शारीरिक दबाव बनाया गया। छोटे बच्चों की परवरिश की शारीरिक कमजोरी के बावजूद, उसे जबरन कलमा पढ़ने, नमाज अदा करने और रोजा रखने के लिए विवश किया गया। यह प्रताड़ना सिर्फ मजहबी नहीं थी, बल्कि जिस्मानी दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी गई थीं। पीड़िता ने कांपते लफ्जों में पुलिस को बताया कि आरोपी वसीम उसकी मर्जी के खिलाफ उसके साथ अप्राकृतिक और घिनौने कृत्य करता था। इतना ही नहीं, दो छोटे बच्चों की मां होने के बावजूद आरोपी उस पर लगातार एक और संतान पैदा करने का अमानवीय दबाव डाल रहा था। इस नर्क जैसी जिंदगी में एक और मासूम को लाने के खौफ से महिला को अपनी जान हथेली पर रखकर, छिपकर अपना गर्भपात कराना पड़ा। जब भी वह इस मजहबी और जिस्मानी जुल्म का विरोध करती, तो आधी रात को उसे बेरहमी से पीटकर घर से बाहर फेंक दिया जाता।
पीड़िता ने बताया कि पारिवारिक हिंसा और धर्मांतरण की हदों को पार करते हुए इस मामले ने तब एक बेहद खतरनाक और देशद्रोही मोड़ ले लिया, जब वसीम की कट्टरपंथी मानसिकता का शिकार उसका अपना पांच साल का बेटा बना। पीड़िता के अनुसार, उसके सामने देश और फौजियों को गालियां दी जाती थीं। आरोपी पिता अपने पांच साल के बच्चे को ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ बोलना सिखाता था। जो उम्र देश के शूरवीरों की कहानियां सुनने और देशभक्ति के संस्कार गढ़ने की होती है, उस उम्र में मासूम को देश की सरहदों की रक्षा करने वाली भारतीय सेना को भद्दी गालियां देने की तालीम दी जा रही थी। एक मां और एक सच्ची हिंदुस्तानी होने के नाते महिला का खून खौल उठा। उसने स्पष्ट किया कि बच्चा अभी नासमझ है, उसे जो संस्कार दिए जाएंगे वह वही सीखेगा। पाकिस्तान उनका मुल्क होगा, हमारा नहीं और वह अपने बच्चे को इस राष्ट्रविरोधी दलदल में किसी भी कीमत पर नहीं रहने देगी। पीड़िता के बताए अनुसार वर्तमान में उसका मुस्लिम पति जो नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त था वो पुलिस की कैद में है। इस वजह से वह हिम्मत कर महिला थाने आई है। उसकी शिकायत के बात अब पाला पुलिस के हाथ में है। फिलहाल इस मामले में पुलिस के आला अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।



