रायगढ़ : राज्य में नई आबकारी नीति (2026-27) लागू होने के बाद से शराब दुकानों पर मदिरा प्रेमियों की लंबी कतारें और शराब की कमी (शॉर्टेज) देखने को मिल रही है।
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इस समस्या पर आबकारी विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि यह किल्लत अस्थाई है और इसका मुख्य कारण कांच की बोतलों की जगह प्लास्टिक की बोतलों (पेट बॉटल) में शराब की आपूर्ति का नया नियम है। विभाग का दावा है कि आगामी एक से दो सप्ताह के भीतर व्यवस्था पूरी तरह से सामान्य हो जाएगी।
मामले की जानकारी देते हुए आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2026-27 की नई आबकारी नीति के तहत अब देसी और सस्ती विदेशी शराब (चीप रेंज) की पूरी आपूर्ति प्लास्टिक की बोतलों में करने का प्रावधान किया गया है। चूंकि पिछले वर्ष तक यह आपूर्ति मुख्य रूप से कांच की बोतलों में होती थी, इसलिए इस बदलाव के कारण डिस्टिलरी और बॉटलिंग यूनिट के संचालकों को अपने पट्टे (लीज) और प्लांट की व्यवस्थाओं को अपडेट करने में समय लग रहा है। इसी तकनीकी देरी के कारण बाजार में सप्लाई प्रभावित हुई है।
अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों (मल्टीनेशनल) के ब्रांड्स की आपूर्ति भी सुचारू रूप से नहीं हो पा रही थी, लेकिन अब उनका स्टॉक आना शुरू हो गया है। उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर मल्टीनेशनल ब्रांड्स की सप्लाई पूरी तरह से पटरी पर आ जाएगी। वहीं, देसी और सस्ती विदेशी शराब की आपूर्ति को सामान्य होने में एक से दो सप्ताह का समय लग सकता है।
कांच की बोतलों को बंद कर प्लास्टिक की बोतलों को अनिवार्य करने के पीछे शासन के तर्क को समझाते हुए अधिकारी ने कहा कि यह सरकार के स्तर पर लिया गया नीतिगत निर्णय है। पूर्व में कांच की बोतलों के ट्रांसपोर्टेशन और लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान भारी मात्रा में टूट-फूट होती थी, जिससे शासन को सीधे तौर पर राजस्व का बड़ा नुकसान उठाना पड़ता था। प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग से डैमेज का यह प्रतिशत न के बराबर रह जाएगा, जिससे सरकारी खजाने को होने वाले नुकसान पर रोक लगेगी।
शराब दुकानों पर लगने वाली भारी भीड़ और अव्यवस्था के सवाल पर अधिकारी ने आश्वासन दिया कि हालात जल्द सुधरेंगे। उन्होंने कहा, “मेरी प्रतिदिन डिस्टिलरी और बॉटलिंग यूनिट्स के मालिकों के साथ चर्चा हो रही है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि जल्द ही उत्पादन और सप्लाई तेज कर दी जाएगी। जैसे ही दुकानों में शराब की पर्याप्त आवक शुरू होगी, भीड़ की समस्या स्वतः ही समाप्त हो जाएगी।”



