बिलासपुर। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर महिला से 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के दो आरोपियों को रेंज साइबर थाना बिलासपुर की टीम ने राजस्थान के चुरू जिले से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर बिलासपुर लाया गया है।
पुलिस, ईडी और सुप्रीम कोर्ट का डर दिखाकर ठगी
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने खुद को पुलिस, ईडी, आरबीआई और सुप्रीम कोर्ट के अधिकारी बताकर महिला को डराया और मानसिक दबाव में लेकर यह ठगी की वारदात को अंजाम दिया।
पीड़िता के मोबाइल पर व्हाट्सएप कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को “संजय PSI” बताया। उसने दावा किया कि महिला का नाम एक आतंकवादी संगठन से जुड़े मामले में सामने आया है और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है।
इसके बाद महिला को वीडियो कॉल के जरिए घंटों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखा गया और लगातार डराया-धमकाया गया।
फर्जी दस्तावेज और धमकियों से बनाया दबाव
आरोपियों ने महिला को फर्जी ईडी नोटिस, सुप्रीम कोर्ट आदेश और आरबीआई के दस्तावेज भेजकर विश्वास में लिया। साथ ही परिवार को फंसाने की धमकी देकर उसे किसी से संपर्क नहीं करने दिया गया।
लगातार दबाव में आकर महिला ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.04 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। इतना ही नहीं, आरोपियों ने केस खत्म कराने के नाम पर 50 लाख रुपये और मांगने की कोशिश की।
बाद में महिला ने अपने पुत्र को पूरी जानकारी दी, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और साइबर थाना बिलासपुर में शिकायत दर्ज कराई गई।
तकनीकी जांच से पकड़े गए आरोपी
जांच के दौरान साइबर पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की ट्रेल को ट्रेस किया। पता चला कि रकम कई लेयर वाले बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने राजस्थान के चुरू जिले से दो आरोपियों—रूपेन्द्र सिंह (21) और विशाल सिंह (20)—को गिरफ्तार किया।
कमीशन के लालच में देते थे बैंक अकाउंट
पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते उपलब्ध कराए थे और ठगी की रकम निकालकर आगे अन्य लोगों तक पहुंचाई थी।
दस्तावेज और उपकरण जब्त
पुलिस ने आरोपियों के पास से बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। मामले में अन्य आरोपियों और पूरे साइबर नेटवर्क की जांच जारी है।



