पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
छत्तीसगढ़/नई दिल्ली. 24 अप्रैल को भारत की सबसे बड़ी जांच एजेंसी ईडी/ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जारी एक प्रेस नोट ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित देश की राजधानी दिल्ली तक कोहराम मचा दिया ? ईडी द्वारा 18 एवं 19 अप्रैल को देश के कई राज्यों के छः जगहों पर सघन तलाशी अभियान चलाया गया था।
यह भी पढ़ें :- छत्तीसगढ़ में विदेशी फंडिंग का खुलासा: ED की जांच में 95 करोड़ की संदिग्ध एंट्री, नक्सल इलाकों तक पहुंच
अभियान से यह बात सामने निकल कर आई कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के ही छह माह के दौरान विदेशी बैंकों के डेबिट कार्डो के माध्यम से 95 करोड़ रुपए देश के विभिन्न इलाकों में निकालें गए। जांच में यह भी पता चला कि देश भर के विभिन्न एटीएम से निकाले गए कैश और उसके इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखने के लिए एक आनलाइन बिलिंग और अकाउंटिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया था।

अब बात करते हैं छत्तीसगढ़ की और खास तौर पर बस्तर की। छत्तीसगढ़ का एक बहुत बड़ा इलाका पिछले चालीस सालों से नक्सल समस्या से जूझ रहा था और इन वर्षों में सैकड़ों हजारों की नक्सलियों द्वारा निर्ममता से हत्या की गई, शायद पूरे आकंड़े राज्य और केंद्र सरकार के पास भी ना हो ? अब राज्य सरकारों सहित केंद्र सरकार का दावा है कि देश से नक्सलवाद पूरी तरह से समाप्त हो गया है, पंरतु आज ही झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले ( चाईबासा ) में एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार जहां गोइलकेरा थाना क्षेत्र के दुगुनिया गांव निवासी एक युवक की नक्सलियों द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई। जो की पहले नक्सल संगठन से जुड़ा था।
यह भी पढ़ें :- Big Expose : बस्तर में विदेशी फंडिंग पर बड़ा खुलासा…! संतोष पाण्डेय ने किए चौंकाने वाले दावे
ईडी के तलाशी अभियान और सघन जांच में यह बात भी निकल कर आई कि वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित छत्तीसगढ़ के धमतरी और बस्तर इलाकों के कई एटीएम से पिछले कुछ सालों में विदेशी डेबिट कार्डो के माध्यम से 6.5 करोड़ रुपए निकाले गए। ईडी द्वारा जारी प्रेस नोट में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि “यह देखा गया है कि इन विदेशी डेबिट कार्डों का इस्तेमाल एक सोची-समझी योजना के तहत बड़ी मात्रा में कैश निकालने के लिए किया जा रहा है, जिससे संगठित गिरोहों की संभावित संलिप्तता का संकेत मिलता है। नक्सल प्रभावित इलाकों में इस तरह की समानांतर कैश-आधारित अर्थव्यवस्था का उभरना भारत की सुरक्षा और वित्तीय अखंडता के लिए एक गंभीर खतरा है, और यह गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए अवैध फंड के लेन-देन को बढ़ावा दे सकता है।”
यह भी पढ़ें :- विदेशी फंडिंग केस पर सियासी घमासान! दीपक बैज का आरोप- ‘ईडी की कार्रवाई BJP का राजनीतिक प्रोपेगेंडा
अब मूल प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि छत्तीसगढ़ राज्य के पुलिस प्रशासन का खुफिया विभाग क्या पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है ? क्योंकि नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से इस इलाके के लिए खुफिया विभाग का बजट करोड़ों रुपए रहता है। खुफिया विभाग का काम ही बारीकी से जानकारी इकट्ठा करना और उसका विश्लेषण करना है ताकि राज्य और राष्ट्र के विरुद्ध की जा रही असंवैधानिक और गोपनीय कृत्यों पर लगाम लगाई जा सके। बस्तर जैसे अतिसंवेदनशील इलाके में एटीएम जैसी सुविधाएं घने जंगलों में तो लगाईं नहीं जायेंगी, वो अत्यंत महत्वपूर्ण और सुरक्षित इलाके में ही स्थापित की जायेगी। मतलब शहरी क्षेत्रों में ही एटीएम का उपयोग किया गया और विदेशी डेबिट कार्डो से निकाले गए पैसों की जानकारी खुफिया विभाग नहीं जुटा सका ? पर कैसे ? वैसे भी नक्सलियों द्वारा बस्तर से ही सैकड़ों करोड़ की लेवी वसूली की जाती रही थी और उन पैसों की चवन्नी-अठन्नी भी ये ना खोज पाए हैं और ना ही ज़ब्त नहीं कर पायें है ?
तो क्या यह छत्तीसगढ़ की पुलिस के खुफिया तंत्र की विफलताओं में एक गिना जाना चाहिए?
वैसे आज ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य के बहुचर्चित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
अगले अंक में – “द टिमोथी इनिशिएटिव (TTI) , Truist Bank, Micah Mark और छत्तीसगढ़ में वर्षों से सुनियोजित धर्मांतरण का षड्यंत्र ?
छत्तीसगढ़ में ध्वस्त पुलिस मुख्यालय का खुफिया विभाग और सूचना तंत्र या वर्षों से सुनियोजित धर्मांतरण का षड्यंत्र…..2.?



