रायपुर। Police System : प्रदेश में पुलिसिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अपराध के आंकड़े कम दिखाने के दबाव में थानों में FIR दर्ज करने से बचा जा रहा है। हालात यह हैं कि रोजाना आने वाली दर्जनों शिकायतों में से सिर्फ गिने-चुने मामलों में ही केस दर्ज हो रहा है, जबकि बाकी शिकायतें जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दी जाती हैं।
शिकायत ज्यादा, FIR कम
सूत्रों के अनुसार, एक थाने में रोज औसतन 10-12 शिकायतें पहुंचती हैं, लेकिन उनमें से केवल 2-3 मामलों में ही FIR दर्ज होती है। बाकी पीड़ितों को बार-बार थाने के चक्कर लगाने पड़ते हैं या उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के पास जाना पड़ता है, जहां से आवेदन फिर थाने ही लौट आता है।
हर जिले में एक जैसा हाल
यह स्थिति सिर्फ रायपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव (Police System) और कोरबा जैसे जिलों में भी सामने आ रही है। चोरी, साइबर ठगी, मारपीट, जमीन विवाद और धोखाधड़ी जैसे मामलों में भी FIR दर्ज करने में टालमटोल की शिकायतें आम हैं।
आंकड़ों का दबाव या सिस्टम की खामी?
जानकारों का मानना है कि कई थानेदार और अधिकारी अपराध के बढ़ते आंकड़े दिखाने से बचना चाहते हैं, जिससे FIR दर्ज करने में हिचकिचाहट होती है। वहीं जांच अधिकारियों की कमी और कार्यभार भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है।
‘पैसे दो, FIR लो’ के आरोप
कुछ मामलों में यह भी आरोप लगे हैं कि FIR दर्ज करने के लिए रकम तक मांगी जा रही है। मारपीट, लेन-देन और जमीन विवाद जैसे मामलों में ‘सेटिंग’ के बाद ही केस दर्ज होने की बात सामने आ रही है, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
कानून क्या कहता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, संज्ञेय अपराध में FIR दर्ज करना पुलिस के लिए अनिवार्य है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 के तहत मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक शिकायत मिलने पर FIR दर्ज करना जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से आम लोगों का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ रहा है। सवाल यह है कि अगर थानों में ही शिकायत दर्ज नहीं होगी, तो पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा?
जरूरत ठोस सुधार की
विशेषज्ञ मानते हैं कि पुलिसिंग में पारदर्शिता, जवाबदेही (Police System) और सख्त निगरानी जरूरी है। जब तक हर शिकायत पर FIR दर्ज करने और समयबद्ध कार्रवाई की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक ‘जनता का मित्र’ कही जाने वाली पुलिस की छवि पर सवाल बने रहेंगे।



