रायपुर/छत्तीसगढ़. भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाले के तहत आर्थिक अपराध के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रायपुर-महासमुंद के नौ ठीकानों में एक साथ रेड की थी। इस रेड की कार्यवाही 16 घंटे तक चली थी। रायपुर–विशाखापत्तनम इकनॉमिक कॉरिडोर में भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले के तार अब मनी लांड्रिंग से भी जुड़ गए हैं। जिसे लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बड़ी कार्यवाही सोमवार को लगातार सुबह 5 बजे से देर रात तक जारी थी।
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ईडी की टीमों ने कुल 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। जिसमें रायपुर में भूमाफिया और मास्टरमाइंड हरमीत सिंह खनूजा, महासमुंद में हरमीत खनूजा के ससुर हरमीत चावला और ऑटोमोबाइल कारोबारी जसबीर सिंह बग्गा समेत उनके सहयोगियों और शासकीय अधिकारी-कर्मचारीयों के ठिकाने शामिल थे। ईडी की टीमें इन ठिकानों पर दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड मोबाइल, कम्प्यूटर, लैपटॉप समेत बैंक लेन-देन से दस्तावेजों की गहन जांच-पड़ताल कर रही थी।
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विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुताबिक भूमाफिया और मास्टरमाइंड हरमीत सिंह खनूजा या मनी म्यूल्स के रूप में उसके ससुर हरमीत चावला और जसबीर सिंह बग्गा में से किसी एक की गिरफ्तारी भी देर रात की गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है पंरतु बताया जा रहा है कि देर रात हरमीत खनूजा को गिरफ्तार कर ईडी के दफ्तर ले जाया गया है। कल छापेमारी के दौरान बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था और किसी को भी अंदर या बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई थी।

भूमाफिया और मास्टरमाइंड हरमीत खनूजा की तहसीलदार पत्नी की भूमिका संदिग्ध और जांच के घेरे में
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक इस पूरे मामले में हरमीत सिंह खनूजा की तहसीलदार पत्नी की भूमिका बहुत संदिग्ध है और इसकी गहन जांच की जा रही है। ईडी की टीम ने उससे जुड़े बैंक खातों, संपत्ति दस्तावेजों और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड सहित डिजिटल उपकरणों को खंगाल रही है। ईडी की टीम ने पति हरमीत खनूजा और उसकी तहसीलदार पत्नी से मुआवजा घोटाले में सभी वित्तीय लेन-देन और इस किये गये भष्ट्राचार से संबंधित दर्जनों सवाल पूछे इस दौरान दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड भी मांग कर गहन जांच-पड़ताल कर सभी को जब्त किया गया।

इनके यहां ईडी द्वारा ताबड़तोड़ छापामार कार्यवाही की गई
(1) भूमाफिया और मास्टरमाइंड हरमीत खनूजा और उसकी तहसीलदार पत्नी.
(2) हरमीत खनूजा के ससुर और मनी म्यूल्स हरमीत चावला
(3) मनी म्यूल्स और आटोमोबाइल कारोबारी जसबीर सिंह बग्गा
(4) निर्भय साहू, तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), अभनपुर
(5) दिनेश पटेल हल्का पटवारी
(6) रोशन लाल वर्मा राजस्व निरीक्षक
(7) शशिकांत कुर्रे, तत्कालीन तहसीलदार
(8) जितेन्द्र साहू तत्काली हल्का पटवारी क. 49, नायकबांधा
(9) बसंती घृतलहरे तत्कालीन पटवारी
(10) लखेश्वर प्रसाद किरण, तत्कालीन नायब तहसीलदार, गोबरा नवापारा
(11) लेखराम देवांगन, पटवारी
भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला
इस कथित घोटाला में पहले भी राज्य सरकार की एसीबी और ईओडब्ल्यू ने अपराध दर्ज कर जांच और गिरफ्तारी की थी। पंरतु संदिग्धों को उच्च एवं उच्चतम न्यायालय से जमानत का लाभ मिल गया था। जांच में सामने आया था कि रायपुर-विशाखापट्टनम इकानॉमिक कॉरिडोर की घोषणा और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद निजी एवं सरकारी जमीनों के बैक डेट में फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। साथ ही जमीन को कई हिस्सों में बांटकर नए नामों को राजस्व रिकॉर्ड में चढ़ाए गए, जिससे जमीनों का मुआवजा कई गुना बढ़ गया।
वास्तविक मुआवजा करीब 29.5 करोड़ रुपये होना चाहिए था, लेकिन कागजी हेरफेर के जरिए इसे 73.5 करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया और इसका भुगतान कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में ही इस प्रक्रिया में सरकारी खजाने को करीब 43 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग और एन.एच.ऐ.आई के अनुसार अभनपुर अनुभाग में 9.38 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए कुल 324 करोड़ रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया था,जिसमें से 246 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इस मामले के उजागर होने के बाद 73 करोड़ रुपये का भुगतान रोक दिया गया है।
आगे क्या
ईडी की छापेमारी सोमवार को 16 घंटे तक जारी थी। खबर लिखे जाने तक एजेंसी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है पंरतु कहा जा रहा है कि इस घोटाले से जुड़े एक व्यक्ति की गिरफ्तारी की गई है। दस्तावेजों की जब्ती, डिजिटल डेटा की जांच और लेन-देन की ट्रेल खंगालने के बाद ही ईडी कोई आधिकारिक बयान जारी कर सकती है। जांच एजेंसी का कहना है कि सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार जांच का मुख्य विषय यह पता लगाना है कि किस तरह मुआवजा राशि का अवैध रूप से हस्तांतरण किया गया और किन-किन व्यक्तियों ने इसमें मदद की है साथ इससे मिलें पैसों का कहां इस्तेमाल हुआ है।
ईडी की इस रेड और भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत हुए इस मुआवजे घोटाले ने राज्य के ना सिर्फ राजनीतिक बल्कि प्रशासनिक हलकों में भी हड़कंप मचा दिया है। मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस घोटाले में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताओं अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से की गई है। आशंका जताई जा रही है कि जैसे जैसे जांच आगे बढ़ेगी इसमें कई राजनेताओं और बड़े अफसरों के नाम भी सामने आ जायेंगे।



