रायपुर। जनजातीय गौरव दिवस 2025 के अवसर पर आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (एनआईबीएसएम), रायपुर ने महिला आदिवासी किसानों के लिए जैव-संसाधन केंद्रों (बीआरसी) पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में कुल 60 महिला किसानों ने भाग लिया, जो आईसीएआर-एनआईबीएसएम की टीएसपी (Tribal Sub Plan) और एससीएसपी (Scheduled Caste Sub Plan) परियोजना गाँवों से जुड़ी हुई थीं।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए निदेशक डॉ. पीके राय ने जैव-संसाधन केंद्रों की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये केंद्र पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने, खेती की लागत कम करने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका में सुधार के लिए बीआरसी को मजबूत करना आवश्यक है।
संयुक्त निदेशक डॉ. ए. अमरेन्द्र रेड्डी और डॉ. अनिल दीक्षित ने टिकाऊ कृषि और स्थानीय जैव इनपुट उत्पादन की तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करते हुए क्लस्टर दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया। वहीं, प्रदान (PRADAN) के कार्यक्रम समन्वयक श्री मुखर्जी ने बीआरसी समूहों को सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत सहयोग की भूमिका पर चर्चा की।
प्रशिक्षण में जैव इनपुट उत्पादन तकनीक, गुणवत्ता मानक, संस्थागत मॉडल और रणनीतियों पर व्यावहारिक प्रदर्शन और समूह चर्चा शामिल थी, जिसका उद्देश्य जनजातीय समुदायों को टिकाऊ कृषि में सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना था। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. एसके शर्मा, डॉ. केसी शर्मा और डॉ. प्रियंका मीना ने किया, जबकि डॉ. पी. मूवेंथन, डॉ. मल्लिकार्जुन और डॉ. श्रीधर ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
समापन सत्र में प्रतिभागियों ने बीआरसी गतिविधियों के विस्तार और टिकाऊ संचालन के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह पहल छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।



