रायपुर। राज्य शासन ने संपत्ति की गाइडलाइन तय करने के नियमों में 25 साल बाद बड़ा संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत अब नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और 18 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों को ‘मुख्य मार्ग’ माना जाएगा।
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इन्हीं मुख्य मार्गों के आधार पर उस इलाके की संपत्ति की गाइडलाइन दर तय होगी। पहले यह स्पष्ट नहीं था कि किन सड़कों को मुख्य मार्ग माना जाएगा, जिससे कई जगह भीड़भाड़ वाली सड़कों को मनमाने तरीके से मुख्य मार्ग घोषित कर गाइडलाइन दरें बढ़ा दी जाती थीं।
मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के निर्देश पर बदलाव
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गाइडलाइन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में गाइडलाइन निर्धारण के नियमों में संशोधन किया गया।
अब न केवल पुराने नियमों की विसंगतियां दूर की गई हैं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई कॉलोनियों और मोहल्लों के लिए भी विशेष प्रावधान जोड़े गए हैं। नया इलाका विकसित होते ही उसके लिए अलग से गाइडलाइन दर तय की जा सकेगी, अब इसके लिए गाइडलाइन पुनरीक्षण का इंतजार नहीं करना होगा।
नए प्रावधानों में सरलीकरण और एकरूपता
नए नियमों में गाइडलाइन निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाया गया है।
मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं-
- सरलीकरण: पहले 77 निर्धारण प्रावधान थे, अब केवल 14 प्रावधान रखे गए हैं।
- एकीकृत दरें: सिंचित, नलकूप या दो फसली भूमि के लिए अलग-अलग मूल्य अब समाप्त किए गए हैं।
- एक गणना प्रणाली: अब निगम, पालिका या नगर पंचायत क्षेत्र में कृषि, नजूल या डायवर्टेड भूमि की गणना एक समान होगी।
- हेक्टेयर दर सीमा: सभी नगरों के लिए अब 0.14 हेक्टेयर की एकसमान दर सीमा तय।
- निर्माण दरें घटाई गईं: पहले 21 प्रकार की निर्माण दरें थीं, अब केवल 8 दरें लागू होंगी।
- बाजार मूल्य का संतुलन: छोटी जमीन का मूल्य बड़ी जमीन से अधिक नहीं होगा; इंक्रीमेंट वैल्यूएशन सिस्टम में सुधार किया गया है।
- औद्योगिक दरें खत्म: औद्योगिक इकाइयों के लिए राज्यभर में अलग दरें नहीं रहेंगी, सभी पर समान दर लागू होगी।
- आम जनता को राहत: डायवर्टेड या नजूल भूमि होने मात्र से संपत्ति का बाजार मूल्य नहीं बढ़ेगा।
- फसली भूमि पर राहत: दो फसली भूमि या गैर परंपरागत फसलों पर 25% वृद्धि अब नहीं होगी।
- नलकूप प्रावधान हटाया गया: नलकूप या ट्यूबवेल होने पर अलग कीमत जोड़ने का नियम समाप्त कर दिया गया है।
कैसे तय होगी गाइडलाइन दर
- नए नियमों के तहत यह निर्धारित किया गया है कि —
- कौन-सी सड़क मुख्य मार्ग मानी जाएगी,
- सड़क से संपत्ति की दूरी कितनी होगी,
- संपत्ति किस तल पर स्थित है,
- और किन परिस्थितियों में दरों में वृद्धि होगी।
इन्हीं आधारों पर अब रजिस्ट्री के समय बाजार मूल्य का आकलन किया जाएगा।
उद्देश्य – पारदर्शिता और संतुलन
राज्य सरकार का कहना है कि इस संशोधन से संपत्ति गाइडलाइन निर्धारण की प्रक्रिया पारदर्शी और व्यावहारिक बनेगी।
मनमाने तरीके से दरें बढ़ाने की प्रवृत्ति खत्म होगी और आम जनता को भी सीधा लाभ मिलेगा।




