रायपुर। नगर निगम की सामान्य सभा की बैठक बुधवार को जमकर हंगामे के बीच हुई। नेता प्रतिपक्ष बदलने के फैसले पर कांग्रेस पार्षदों में फूट साफ दिखाई दी। पूर्व नेता प्रतिपक्ष संदीप साहू ने आरोप लगाया कि उन्हें “साजिश के तहत” पद से हटाया गया है। साहू ने कहा — “मैं मुद्दे उठाने वाला था, इसलिए मुझे बाहर किया गया। सामान्य सभा से एक दिन पहले, रात 8 बजे सूचना जारी की गई। क्या पार्टी नहीं चाहती कि मैं सदन में सवाल उठाऊं?
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संदीप साहू ने सभा में तीखी आपत्ति दर्ज कराई और बाद में वॉकआउट कर बाहर निकल गए। उनके साथ चार पार्षदों ने भी सभा छोड़ दी।
सभापति सूर्यकांत राठौर ने जवाब देते हुए कहा — “मैं दबाव में काम नहीं करता। कांग्रेस कमेटी से आकाश तिवारी का नाम आया, उसे स्वीकार किया गया। दिवाली से पहले किसी को नाराज नहीं करना चाहता था, इसलिए फैसला अब लिया गया।”
महापौर मीनल चौबे ने भी संगठन पर तंज कसा — “नेता प्रतिपक्ष चुनने का काम संगठन का है, लेकिन उनके संगठन में समन्वय की भारी कमी दिखी है।”
वहीं नए नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने सदन में पदभार संभालते ही तेवर दिखाए। उन्होंने GST रिफॉर्म्स पर लाए गए “आभार प्रस्ताव” का विरोध करते हुए कहा — “यह आभार नहीं, निंदा प्रस्ताव होना चाहिए। GST जनता पर थोपे गए गब्बर सिंह टैक्स की तरह है, जिसने छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी है।”
उनके बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, लेकिन विपक्ष अपने रुख पर अड़ा रहा।
बैठक में तात्यापारा से शारदा चौक तक सड़क चौड़ीकरण, महादेवघाट कॉरिडोर और खमारडीह चौक की प्रीमियम शराब दुकान जैसे मुद्दों पर भी जमकर बहस हुई। भाजपा पार्षद राजेश गुप्ता ने शराब दुकान हटाने की मांग उठाई, कहा — “भीड़ और ट्रैफिक जाम से जनता त्रस्त है, अगर कार्रवाई नहीं हुई तो विरोध होगा।”
आकाश तिवारी ने स्काई वॉक परियोजना को “बेफिजूल खर्च” बताते हुए कहा कि नागरिक सुविधाओं और सड़क सुधार पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
इस बीच निगम कमिश्नर की अनुपस्थिति पर भी विपक्ष ने नाराजगी जताई। आकाश तिवारी ने कहा — “जब शहर के अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है, तो सर्वोच्च अधिकारी का अनुपस्थित रहना प्रशासन की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।”
कुल 14 एजेंडों पर चर्चा के दौरान माहौल कई बार गर्माया। महादेवघाट कॉरिडोर (20 करोड़ की परियोजना) को लेकर भी पार्षदों के बीच मतभेद देखने को मिले — कुछ ने इसे धार्मिक पर्यटन के लिए फायदेमंद बताया, तो कुछ ने इसे “मूलभूत जरूरतों से ध्यान भटकाने वाला प्रोजेक्ट” करार दिया।



