बिलासपुर। मौसाजी स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट में स्टेट जीएसटी विभाग की तीन दिन चली जांच में बड़ी टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है। जांच में पता चला कि फर्म प्रतिदिन 1000 किलो से अधिक मिठाई बनाती थी, लेकिन इनवॉइस में केवल आधा कारोबार दिखाया जाता था। चोरी पकड़े जाने के बाद फर्म ने 1.5 करोड़ रुपए टैक्स सरेंडर किए।
जांच में यह भी सामने आया कि कारखाने से दुकानों तक मिठाई की सप्लाई बिना इनवॉइस, केवल कच्चे चालान पर होती थी। दुकानों में मिठाई पहुंचने के बाद चालान फाड़ दिए जाते थे और महीने के अंत में केवल 50% कारोबार का इनवॉइस बनाकर टैक्स भरा जाता था। पुराने चालान बुक नष्ट कर दिए जाते थे।
त्योहारों के समय — रक्षाबंधन और दिवाली — बिक्री चार से पांच गुना बढ़ जाती थी, लेकिन इनवॉइस में केवल न्यूनतम राशि दिखाई जाती थी। उदाहरण के लिए, रक्षाबंधन पर 17,000 और दिवाली पर 48,000 रुपए की मिठाई का ही रिकॉर्ड था। प्रीमियम गिफ्ट हैंपर की बिक्री का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
जांच में यह भी पाया गया कि दुकानों में करीब 60% नकद लेनदेन का कोई हिसाब नहीं था। इसके अलावा, रेस्टोरेंट में खरीदी गई मैदा, आलू, तेल, बेसन और अन्य सामग्री पर इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया, लेकिन तैयार उत्पादों पर सही टैक्स जमा नहीं किया गया।
फर्म तीन अलग-अलग जीएसटी नंबर से कुल पांच स्टोर और एक बड़ा कारखाना चला रही थी। जांच के तीसरे दिन अधिकारियों को मंगला स्टोर से मिले चालान ने पूरे रैकेट का खुलासा किया।



