रिपोर्ट- नसीम अंसारी
अंबिकापुर। केते एक्सटेंशन ओपन कोल माइंस को पर्यावरण विभाग से मंजूरी मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय” बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि इस खदान विस्तार से रामगढ़ पहाड़ी को गंभीर पर्यावरणीय नुकसान होगा।
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सिंहदेव ने कहा कि रामगढ़ पर्वत से लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित प्राचीन राम मंदिर और आसपास की प्राकृतिक संरचना खनन के प्रभाव से प्रभावित हो सकती है। यह मंजूरी प्रधानमंत्री कार्यालय और पर्यावरण मंत्रालय से जानकारी प्राप्त होने के बाद दी गई है।
बता दें कि टी.एस. सिंहदेव पहले भी रामगढ़ पर्वत क्षेत्र में कोयला खनन की अनुमति दिए जाने का विरोध कर चुके हैं। कांग्रेस की जांच टीम ने भी स्थल का सर्वे कर संभावित नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें खनन से पर्यावरण और धरोहरों पर खतरे की बात कही गई है।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में भी इस मंजूरी को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि खनन शुरू होने पर पहाड़ी का भू–क्षरण, वन क्षेत्र का नुकसान और प्रदूषण में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों पर भी असर पड़ेगा।
फिलहाल इस मुद्दे पर विरोध के स्वर तेज होते दिखाई दे रहे हैं और आने वाले दिनों में मामला और गर्माने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार करे।



